सोमवार को दिव्यांग बेटी का शव पहुंचने पर मां कृष्णा बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ी। बहनें बिलखने लगीं। बहन की अर्थी को कंधा देने में भाइयों के हाथ कांप गए।
सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद दोपहर 1.30 बजे कंचन का शव मौर्या मार्केट स्थित घर पहुंचा तो परिजनों में चीखपुकार मच गई। छोटे भाई मनीष, हर्षित और अश्वनी बदहवास नजर आए। वहां मौजूद लोगों के आंसू भी छलक पड़े। सुरक्षा को लेकर पुलिस फोर्स तैनात रही।
चिलबिला निवासी मक्खनलाल जायसवाल के छह बेटे और पांच बेटियां थीं। सबसे बड़ी संतान कंचन दिव्यांग थी। वह प्रयागराज-अयोध्या हाईवे पर स्थित मौर्या मार्केट में अपने घर के एक कमरे में ब्यूटी पार्लर चलाती थी। मक्खनलाल ने कंचन और पांच बेटों के नाम पूरी संपत्ति की वसीयत कर दी थी। सचिन को बेदखल कर दिया था।
सचिन ने जालसाजी करते हुए खतौनी में अपना नाम चढ़वा लिया और दो भाइयों ऋषि व शशि को अपने पाले में करके घर में बनी दुकानों का फर्जी तरीके से इकरारनामा रंजीतपुर चिलबिला निवासी अजय कुमार यादव उर्फ श्याम यादव और महुली माधोगंज निवासी सौरभ जायसवाल के नाम कर दिया।
इसके बाद जबरन दो दुकानों पर कब्जा कर ताला लगा दिया गया। साथ ही घर खाली करने की धमकी दी जा रही थी। बार-बार शिकायत के बाद भी पीड़ितों की पुलिस नहीं सुनी तो प्रताड़ना से आहत कंचन ने आत्मघाती कदम उठा लिया। घटना के बाद रविवार को छह घंटे हंगामा हुआ था।