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मेडिकल कालेज में अव्यवस्था का आलम, ऑक्सीजन पाइपलाइन में लीकेज

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प्रतापगढ़। कोरोना की तीसरी लहर आने से पहले शासन ने मेडिकल कॉलेज सहित सभी सरकारी अस्पतालों में लाखों का बजट जारी कर स्वास्थ्य उपकरण सहित ऑक्सीजन कसंट्रेटर मुहैया कराए थे। सामान्य मरीजों की आवाजाही कम होने के बाद मेडिकल कॉलेज सहित सीएचसी में अव्यवस्था का आलम है। महंगे स्वास्थ्य उपकरण सहित अन्य सामान इधर-उधर फेंक दिए गए हैं।
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राजा प्रताप बहादुर मेडिकल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ऑक्सीजन पाइपलाइन में बीते दस दिन से लीकेज की समस्या है। वार्ड के बेडों पर इंसुलेटर बोर्ड की मदद ऑक्सीजन देने के लिए उपकरण निकालकर रख दिए गए हैं। दस ऑक्सीजन कसंट्रेटर कोने में धूल फांक रहे हैं। दो लाख रुपये की लागत वाले ऑक्सीजन कसंट्रेटर देखरेख के अभाव में खराब हो सकते हैं, लेकिन इसकी चिंता स्वास्थ्य कर्मचारियों को नहीं है। मरीजों की सुविधा के लिए इमरजेंसी के बरामद में रखे पांच स्ट्रेचर में तीन के पहिये ही गायब हो गए हैं। दुर्घटना में घायल मरीजों को एंबुलेंस से वार्ड में शिफ्ट करने के लिए समय पर स्ट्रेचर नहीं मिल रहा है।
इमरजेंसी वार्ड के कर्मचारियों के मुताबिक, बरामदा से स्ट्रेचर लेकर अलग-अलग वार्डों में जाने वाले मरीजों के तीमारदार स्ट्रेचर नहीं लौटाते हैं। जबकि कुछ मरीजों को इमरजेंसी के स्ट्रेचर पर शिफ्ट कर तीमारदार निजी अल्ट्रासांउड केंद्र व एक्स-रे कराने जा रहे हैं। इमरजेंसी के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मी भी स्ट्रेचर लेकर इधर-उधर भागने वालों पर अंकुश नहीं लगा रहे हैं।
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स्वास्थ्य उपकरणों की देखरेख में लापरवाही की जांच कराई जाएगी। कोई मनमानी करेगा तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी।
डॉ. सुरेश सिंह, सीएमएस
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