सीओ जिया उल हक की हत्या के बाद बिलखती पत्नी। फाइल फोटो
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भीड़ ने की थी हत्या
मामले की केस डायरी के अनुसार, 2 मार्च, 2013 की शाम साढ़े सात बजे जमीन विवाद के चलते प्रतापगढ़ के कुंडा के बलीपुर गांव के प्रधान नन्हें यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना की सूचना पर प्रधान नन्हें यादव के समर्थक बड़ी संख्या में हथियारों से लैस होकर बलीपुर पहुंच गए थे और कामता पाल के घर को आग के हवाले कर दिया। इसकी जानकारी मिलने पर तत्कालीन सीओ कुंडा जिया उल हक, हाथीगवां थाना प्रभारी मनोज कुमार शुक्ला और कुंडा थाना प्रभारी सर्वेश मिश्र पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे।
भीड़ ने पुलिस को घेर लिया, जिसपर पुलिसकर्मी भाग गए। वहीं, भीड़ को समझा रहे सीओ से झड़प में प्रधान नन्हें यादव के छोटे भाई सुरेश यादव की गोली लगने से मौत हो गई। इसके बाद भीड़ ने सीओ जियाउल हक की पिटाई के बाद गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।
देवरिया जनपद के नूनखार टोला जुआफर के रहने वाले सीओ जिया उल हक को 2012 में कुंडा सर्किल की जिम्मेदारी मिली थी। हथिगवां के बलीपुर गांव में दो मार्च 2013 की शाम प्रधान नन्हे सिंह यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह हत्या उस समय हुई थी। जब वह विवादित जमीन के पास चाय की दुकान पर बैठा था। सीओ की हत्या में प्रधान नन्हें सिंह के बेटे योगेंद्र उर्फ बबलू व भाई पवन, फूलचंद्र और गार्ड मंजीत को मुख्य आरोपी बनाया गया था।
खड़ंजे पर मिला था शव
पुलिस ने रात 11 बजे सीओ की तलाश शुरू की तो उनका शव प्रधान के घर के पीछे खड़ंजे पर पड़ा मिला। तिहरे हत्याकांड को लेकर कुल तीन एफआईआर दर्ज कराई गई थी। पहली रिपोर्ट थाना प्रभारी मनोज शुक्ला ने प्रधान नन्हें यादव के भाईयों और बेटे समेत 10 लोगों के खिलाफ दर्ज कराई। वहीं, प्रधान और सुरेश की हत्या को लेकर भी रिपोर्ट दर्ज हुई थी। सीओ की पत्नी परवीन आजाद ने इस मामले में आखिरी एफआईआर दर्ज कराई थी।
दबाव में सीबीआई को सौंपा गया मामला
घटना के कुछ दिन बाद ही सरकार पर निष्पक्ष जांच का दबाव पड़ने लगा था। इसे देखते हुए सपा सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने आठ मार्च, 2013 को मामला दर्ज किया कर विवेचना शुरू की थी। इस मामले में सीबीआई ने सबसे पहले अप्रैल, 2013 में पवन यादव, फुलचंद्र, मंजीत यादव और नन्हें यादव के किशोर बेटे को गिरफ्तार किया था।