कार्तिक पांडेय ने तैयार किया है चंद्रयान 4 रोवर का मॉडल।
- फोटो : संवाद
कार्तिक ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी में बीटेक (कंप्यूटर साइंस) द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। इसरो के दो वैज्ञानिकों की टीम ने विद्यालय आकर मॉडल को देखा। अंतिम चरण में इसरो की 20 सदस्यीय वैज्ञानिकों की टीम ने रोवर से जुड़े नए आविष्कारों के बारे में टीम से पूछा। इसके बाद कार्तिक की टीम सामर्थ्य तीसरे स्थान पर चयनित हुई। टीम में कार्तिक के अलावा बीटेक छात्रा मुस्कान और छात्र विराज सिंह हैं, जिन्होंने सहयोग दिया।
रोवर का नए तरीके से बनाया पहिया
चंद्रयान-4 मिशन के लिए बनाए गए रोवर के मॉडल का पहिया कार्तिक टीम ने सबसे बेहतर बनाया। बेंगलूरू में हुए प्रयोग में कार्तिक की टीम का रोवर दो बार चांद की मिट्टी उठाने में सफल रहा। तीसरे प्रयास में समय कम होने के कारण रोवर मिट्टी नहीं उठा सका। साथ ही रोवर में दो जूम आप्टिकल कैमरे लगाए गए हैं। कार्तिक ने रोवर का कॉपीराइट करा लिया। उन्होंने बताया कि कई ऐसी चीजें है जिनको अभी बताया नहीं जा सकता।
सिर्फ तीन लोगों की टीम, इसरो प्रमुख ने दी बधाई
कार्तिक की सबसे छोटी टीम थी। इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने कार्तिक की टीम को बधाई दी। कहा कि चंद्रयान-4 का रोवर इस बार चांद की सतह से मिट्टी लाने में सक्षम होगा। इसी को प्रयोग करके विद्यार्थियों ने दिखाया।
पिता फौज में, दो भाइयों में छोटे हैं कार्तिक
कार्तिक के पिता वीरेंद्र पांडेय भारतीय सेना में पदस्थ है। मां कंचन पांडेय गृहणी हैं। बड़े भाई हेमंत पांडेय है। कार्तिक की प्रारंभिक शिक्षा आर्मी स्कूल में हुई। न्यू एंजिल्स से तीसरी से पांचवीं तक पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने श्रीगंगानगर व जोधपुर आर्मी स्कूल से 9वीं तक की पढ़ाई की। ब्लूमिंग इंटरनेशनल स्कूल राजस्थान से बारहवीं की शिक्षा प्राप्त की। कार्तिक ग्रेटर नोएडा के शारदा यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक के द्वितीय वर्ष के छात्र हैं।