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उपलब्धि : प्रतापगढ़ के कार्तिक पांडेय ने बनाया चंद्रयान-4 के रोवर का मॉडल, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

Thu, 29 Aug 2024 01:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़

सार

इसरो रोबोटिक्स प्रतियोगिता के माध्यम से चंद्रयान-4 के लिए नए आइडिया की तलाश कर रहा था। इसके तहत 2023 में देश के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों से बीटेक छात्रों के आवेदन मांगे थे। रोबोटिक्स प्रतियोगिता के लिए देश से 1500 टीमों ने नामांकन कराया, जिसमें पहले चरण में 275 विद्यालयों ने प्रपोजल रिपोर्ट दी। दूसरे चरण में आइडिया के मुताबिक, 142 टीमें चयनित हुईं।
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प्रतापगढ़ के कार्तिक को सम्मानित करतीं राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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गड़वारा नगर पंचायत के डड़वा गांव निवासी बीटेक छात्र कार्तिक पांडेय की टीम के बनाए चंद्रयान-4 के रोवर मॉडल को इसरो ने सर्वश्रेष्ठ तीन मॉडलों में चयनित किया। 23 अगस्त को पहले राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कार्तिक की टीम को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

इसरो रोबोटिक्स प्रतियोगिता के माध्यम से चंद्रयान-4 के लिए नए आइडिया की तलाश कर रहा था। इसके तहत 2023 में देश के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों से बीटेक छात्रों के आवेदन मांगे थे। रोबोटिक्स प्रतियोगिता के लिए देश से 1500 टीमों ने नामांकन कराया, जिसमें पहले चरण में 275 विद्यालयों ने प्रपोजल रिपोर्ट दी। दूसरे चरण में आइडिया के मुताबिक, 142 टीमें चयनित हुईं।

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तीसरे चरण में विद्यार्थियों को चंद्रयान-4 मिशन के लिए रोवर तैयार करने का टास्क दिया गया। इस पर रोवर का हाई व साॅफ्ट डिजाइन सभी टीमों ने तैयार किया। इसके लिए सभी विद्यार्थियों को नंवबर 2023 से दो महीने का समय दिया गया था। साथ ही इसरो ने प्रत्येक टीम को दो-दो लाख रुपये मॉडल बनाने के लिए सहायता दी। जनवरी में सभी टीमों ने मॉडल प्रस्तुत किए। कार्तिक की सामर्थ्य टीम का चयन टॉप 20 टीमों में हुआ।

कार्तिक पांडेय ने तैयार किया है चंद्रयान 4 रोवर का मॉडल। - फोटो : संवाद

कार्तिक ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी में बीटेक (कंप्यूटर साइंस) द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। इसरो के दो वैज्ञानिकों की टीम ने विद्यालय आकर मॉडल को देखा। अंतिम चरण में इसरो की 20 सदस्यीय वैज्ञानिकों की टीम ने रोवर से जुड़े नए आविष्कारों के बारे में टीम से पूछा। इसके बाद कार्तिक की टीम सामर्थ्य तीसरे स्थान पर चयनित हुई। टीम में कार्तिक के अलावा बीटेक छात्रा मुस्कान और छात्र विराज सिंह हैं, जिन्होंने सहयोग दिया।

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रोवर का नए तरीके से बनाया पहिया
 
चंद्रयान-4 मिशन के लिए बनाए गए रोवर के मॉडल का पहिया कार्तिक टीम ने सबसे बेहतर बनाया। बेंगलूरू में हुए प्रयोग में कार्तिक की टीम का रोवर दो बार चांद की मिट्टी उठाने में सफल रहा। तीसरे प्रयास में समय कम होने के कारण रोवर मिट्टी नहीं उठा सका। साथ ही रोवर में दो जूम आप्टिकल कैमरे लगाए गए हैं। कार्तिक ने रोवर का कॉपीराइट करा लिया। उन्होंने बताया कि कई ऐसी चीजें है जिनको अभी बताया नहीं जा सकता।
 
सिर्फ तीन लोगों की टीम, इसरो प्रमुख ने दी बधाई
 
कार्तिक की सबसे छोटी टीम थी। इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने कार्तिक की टीम को बधाई दी। कहा कि चंद्रयान-4 का रोवर इस बार चांद की सतह से मिट्टी लाने में सक्षम होगा। इसी को प्रयोग करके विद्यार्थियों ने दिखाया।
 
पिता फौज में, दो भाइयों में छोटे हैं कार्तिक
 
कार्तिक के पिता वीरेंद्र पांडेय भारतीय सेना में पदस्थ है। मां कंचन पांडेय गृहणी हैं। बड़े भाई हेमंत पांडेय है। कार्तिक की प्रारंभिक शिक्षा आर्मी स्कूल में हुई। न्यू एंजिल्स से तीसरी से पांचवीं तक पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने श्रीगंगानगर व जोधपुर आर्मी स्कूल से 9वीं तक की पढ़ाई की। ब्लूमिंग इंटरनेशनल स्कूल राजस्थान से बारहवीं की शिक्षा प्राप्त की। कार्तिक ग्रेटर नोएडा के शारदा यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक के द्वितीय वर्ष के छात्र हैं।
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