घटना के बाद हंगामा करते कांवड़िये।
- फोटो : अमर उजाला।
संतोष भी नदी की ओर जाते समय निर्माणाधीन घाट की सरिया में उलझकर सई नदी में बने पानी भरे गड्ढे में गिरकर डूबने लगा। लोगों के शोर मचाने पर स्थानीय गोताखोर उमेश कुमार गौड़ गड्ढे में कूद पड़ा। मशक्कत के बाद बेहोशी की हालत में बाहर निकाला। सूचना के बाद भी एंबुलेंस समय से नहीं पहुंची। यह देख कांवड़िये शोर शराबा करने लगे। जिसके बाद प्राइवेट कार से संतोष को सीएचसी बेलखरनाथ लाया गया।
हालत गंभीर देख वहां से चिकित्सकों ने मेडिकल कॉलेज भेजा। यहां जांच के दौरान डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पान विक्रेता पिता श्रीपाल परिजनों के साथ अस्पताल पहुंचा। परिजनों के रोने बिलखने से माहौल गमगीन हो उठा। परिजन चौकी प्रभारी जिला अस्पताल से पोस्टमार्टम न कराए जाने की मनुहार करते रहे लेकिन बाद में शव को मॉर्चरी भेज दिया। मृतक तिलक इंटर कॉलेज में कक्षा दस का छात्र था। तीन भाइयों व एक बहन में सबसे छोटा था।
नदी के बगल इसी गड्ढे में डूबने से कांवड़िये की मौत हुई है।
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हैरत की बात यह देखने को मिली तमाम दावों के बाद भी
बाबा धाम में पर्याप्त पुलिस बल न तो मौजूद था और न ही गोताखोरों का इंतजाम था। धाम पर जलाभिषेक भगवान भरोसे चल रहा है। घटना से आक्रोशित कांवड़ियां हंगामा करते हुए मंदिर के प्रवेश द्वार पर बैठ गए। कुछ देर बाद कंधई थानाध्यक्ष अवन कुमार दीक्षित व समिति के पदाधिकारियों ने कांवड़ियों को समझाबुझाकर हटाया। प्रभारी तहसीलदार पवन कुमार सिंह से उनकी झड़प भी हुई। सीओ पट्टी आनंद राय के पहुंचने पर दिलीपपुर व कंधई थाने की फोर्स को संभावित दुर्घटनास्थल पर मुस्तैद किया गया। पुल पर चौकीदारों को निगरानी के लिए तैनात किया। श्रद्धालुओं का कहना है कि जलाभिषेक को देखते हुए एंबुलेंस तक का इंतजाम नहीं था।
रोक रहे थे परिजन, जलाभिषेक के लिए संतोष को घसीट ले गई मौत
मृतक कांवड़ियां संतोष पाल के पिता श्रीपाल का कहना था कि उसने अपने भाई से गंगा जल मंगा लिया था। रविवार को वह जलाभिषेक के लिए जाने लगा तो उसे परिजन मना करने लगे। वह सबसे झगड़ा करने के बाद जलाभिषेक के लिए रवाना हुआ। उसकी मौत उसे घसीटकर ले गई। लोगों का यह भी कहना था कि यदि समय पर उपचार मिला होता तो उसकी जान बच सकती थी।
बिजली न होने से सूख गई थी पानी की टंकी
बेलखरनाथ धाम। शिव धाम में रविवार की रात ही बड़ी संख्या में कांवड़ियां जलाभिषेक के लिए पहुंच गए। बिजली न होने से अंधेरा था। पानी की टंकी खाली होने के कारण लोग नदी में नहाने लगे। नदी में नहाने से भक्तों को रोकने के लिए लगी बैरीकेटिंग भी काम न आई। लोगों का कहना था कि टंकी में पानी होता तो घटना न होती।
समिति के लोगों के प्रयास से टला बवाल
बाबा बेलखरनाथ धाम। कांवड़ियां नदी में डूबने के बाद हो रहे हंगामे पर सेवा समिति के बांके सिंह, बद्रीनाथ गिरी विश्वनाथ गिरी, सिकंदर सिंह, अजय यादव, माताबदल सिंह, अजीत कुमार ओझा ने कांवड़ियों को समझाबुझाकर बवाल टाला। कांवड़ियों का आरोप था कि टंकी में पानी नहीं था। हैंडपंप से साफ पानी नहीं आ रहा था।
बाबा धाम पर जलाभिषेक करने आने वाले कांवड़ियों के सभी प्रबंध किए गए हैं। मना करने के बाद भी कांवड़ियां खतरे वाली जगह पर सई नदी में स्नान करने चले गए। पर्याप्त मात्रा में सुरक्षाकर्मी व गोताखोर लगाए गए हैं। जिस स्थान पर घटना हुई है। वहां किन लोगों की ड्यूटी लगाई गई थी। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। - पवन कुमार सिंह, प्रभारी तहसीलदार