प्रतापगढ़। वित्तीय वर्ष के आखिरी समय में जिले के विभिन्न विभागों को विकास कार्यों के लिए मिली धनराशि खर्च न हो पाने के कारण शासन को सरेंडर करनी पड़ी। जनपद के अफसरों ने 104.72 करोड़ रुपये लौटा दिए। जनवरी माह में बजट मिलने का दावा करते हुए अफसरों ने जिले में आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण विकास कार्य कराने में असमर्थता प्रकट कर दी। डीएम का दबाव भी अफसरों पर कोई असर नहीं डाल सका। वित्तीय वर्ष के अंत में जिसका डर था, वही हुआ।
जिले में सड़क, तालाब, स्कूल भवन, किसानों को सब्सिडी, नहरों पर पुल बनाने के लिए मिले 104.72 करोड़ रुपये अफसरों को लौटाने पड़े हैं।
लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, लघु सिंचाई, स्कूल भवन निर्माण के लिए यह धनराशि विभागों को मिली हुई थी। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि जनवरी माह में विभागों को यह धनराशि मिली थी। उस समय जिले में विधानसभा चुुनाव की तैयारियों के चलते और बाद में आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण न तो टेंडर निकाल सके और न ही धनराशि का सदुपयोग कर सके। मार्च माह के अंतिम सप्ताह में डीएम और सीडीओ ने अफसरों के साथ बैठक कर विभागों को मिले बजट को खर्च करने के लिए दबाव बनाया था, मगर यह भी काम नहीं आया। अफसरों ने अपने को सुर क्षित करने के लिए बजट खर्च करने की जहमत नहीं उठाई।
इससे जिले के विकास के लिए आई धनराशि शासन को लौटानी पड़ी। अकेले लोक निर्माण विभाग ने 27.14 करोड़ रुपये लौटाए हैं। जबकि सिंचाई विभाग ने 6.12 करोड़ रुपये खर्च करने से हाथ खड़े कर दिए। अफसरों का दावा है कि अप्रैल माह में विभाग के डिमांड भेजने पर यह धनराशि पुन: मिल जाएगी। हालांकि विभागीय जानकारों का कहना है कि शासन को लौटाई गई धनराशि रखी नहीं रहती है, बल्कि दूसरे जनपदों को विकास कार्य कराने के लिए भेज दी जाती है। अब नए बजट में आवंटित धनराशि ही मिलेगी।
किस विभाग ने कितने रुपये किए सरेंडर
लोक निर्माण विभाग 27.14 करोड़
सिंचाई विभाग 6.12 करोड़
लघु सिंचाई 3.36 करोड़
बेसिक शिक्षा 30.1 करोड़
उद्यान 1.11 करोड़
माध्यमिक शिक्षा 24.0 करोड़
स्वास्थ्य विभाग 13.2 करोड़
विभागाध्यक्षों को बजट सरेंडर करने के लिए अब कोषागार नहीं आना होता है। वे अपने नियंत्रक को पत्र लिखकर सरेंडर कर देते हैं। इससे वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं हो पाती है।
दीपक बाबू, वरिष्ठ कोषाधिकारी