होली को लेकर महीने भर पहले से होने वाली तैयारी इस बार नहीं दिख रही है। न पहले की तरह घरों में गुझिया बनाने के लिए महिलाओं में उत्साह है न आलू का पापड़ बनाने को लेकर बेचैनी। लंबी कवायद और खर्च से बचने के लिए अब लोग बाजार की गुझिया पर निर्भर हो गए हैं। ग्राहकों का रुझान देखकर मिठाई के दुकानदारों ने बड़े पैमाने पर गुझिया तैयार की है। लगातार आर्डर भी मिल रहे हैं।
अब तक होलीे का त्यौहार करीब आते ही आलू के पापड़, चिप्स, गुझिया, नमकीन आदि बनाने में महिलाएं जुट जाती थीं। इन सामानों को तैयार करने में लंबा वक्त लगता था। लेकिन बाजार में इन चीजों की आसानी से उपलब्धता के कारण अब लोग दुकानों के भरोसे हैं। न महीने भर की कवायद है न अथक मेहनत। खर्चा भी खरीदने में कम आ रहा है।
घर-घर गुझिया बनने का परंपरा खत्म होने के कारण बाजार में गुझिया के दामों में भी उछाल है। 280 रुपये किलो सूजी और तीन सौ रुपये किलो खोवा की गुझिया बिक रही है। वहीं 65 रुपये पैकेट पापड़, दो सौ रुपये किलो चिप्स, ढाई सौ रुपये किलो चायनीज पापड़, 80 रुपये पैकेट साबूनदाना पापड़ की बिक्री दुकानदार कर रहे हैं। मौर्य स्वीट हाऊस के संचालक सुनील मौर्य ने बताया बीते वर्ष होली पर डेढ़ क्विंटल गुझिया की बिक्री हुई थी। इस बर्ष तीन से चार क्विंटल तक बिक्री का अनुमान लगाया जा रहा है। कारीगर गुझिया तैयार करने में जुट गए हैं। गाजी मिष्ठान भंडार के संचालक ने बताया कि तैयारी शुरू है। बीते वर्ष से ज्यादा बिक्री का अनुमान लगाया जा सकता है।
घर-घर होली और पापड़ बनना बंद हो गया तो इस बार बेल्हा में चायनीज पापड़ आ गया है। दुकानदार सबसे आगे उसी को रख रहे हैं। चायनीज पापड़ रंगीन है और देखने में भी अच्छा लग रहा है। अन्य पापड़ एक बार मसलने के बाद टूट जाता है, मगर कच्चे चायनीज पापड़ को तोडने के लिए दम लगाना पड़ रहा है। मूंग और आलू के पापड़ से ज्यादा दामों में दुकानदार चायनीज पापड़ बेच रहे हैं।