प्रयागराज का रहने वाला, तीन साल पहले प्रतापगढ़ में हुई थी तैनाती
तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव प्रतापगढ़ में तीन साल से पहले कौशाम्बी से स्थानांतरित होकर आया था। उसकी पहली तैनाती कुंडा तहसील में हुई थी। वहां कुछ दिनों तक रहने के बाद उसे लालगंज भेजा गया था। जनवरी 2021 में लालगंज से रानीगंज तहसील में तैनाती मिली थी। आरोपी तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव प्रयागराज का रहने वाला है।
आरक्षी के प्यार में दीवाने तहसीलदार ने कराया था तलाक
पुलिस के अनुसार, महिला आरक्षी रुचि सिंह मूल रूप से बिजनौर के नजीबाबाद की रहने वाली थी। उसकी शादी जून 2019 में कांस्टेबल नीरज के साथ हुई थी। दिसंबर 2019 में रुचि भी पुलिस में भर्ती हो गई, लेकिन इससे पहले से ही प्रयागराज के पद्मेश श्रीवास्तव से उसका प्रेम चल रहा था। नौकरी पाने के बाद रुचि ने अपने पुराने प्रेम को उजागर कर दिया। इसके पहले उसने पति नीरज के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज करवाया। इसके बाद पद्मेश के कहने पर तलाक का केस फाइल कर दिया। कुछ महीने बाद ही दोनों का तलाक हो गया। रिश्ता टूटने के बाद पद्मेश और रुचि खुलकर मिलने-जुलने लगे। तहसीलदार पद्मेश ने रुचि का उसके पति से तलाक करवाया था।
ट्रांजिट हॉस्टल में भी महिला आरक्षी का था आना-जाना
महिला आरक्षी की हत्या के बाद छानबीन में जुटी लखनऊ पुलिस को पता चला है कि तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव के सरकारी आवास पर भी रुचि सिंह का आना-जाना था। चूंकि पद्मेश का परिवार प्रयागराज में रहता था। पद्मेश शादीशुदा होने के बावजूद रुचि से रिलेशनशिप में था। वह अक्सर रुचि से मिलने उसके गोमतीनगर विस्तार के सुलभ आवास में किराये के फ्लैट पर जाता था। यही नहीं, रुचि भी उसकी पत्नी बनकर प्रतापगढ़ में उसके सरकारी आवास पर कई दिनों तक रहती थी। पुलिस के अनुसार पद्मेश ने उसे भरोसा दिलाया था कि शादी करने के बाद लखनऊ में फ्लैट लेकर दोनों वहीं रहेंगे।
रातभर समझाया, दूसरे दिन बदमाशों से कत्ल कराकर हुआ फरार
लखनऊ पुलिस के अनुसार, 13 फरवरी से लापता रुचि की कॉल डिटेल खंगाली गई तो पता चला कि आखिरी बार उसकी बात पद्मेश से हुई थी। घरवालों से संपर्क करने पर पता चला कि 12 फरवरी को पद्मेश रुचि से मिलने पहुंचा था। रविवार को पुलिस ने पद्मेश को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की तो पता चला कि 12 फरवरी की रात उसके साथ वह रुका था। रातभर उसे समझाने का प्रयास किया कि दोनों की शादी के लिए उसकी पत्नी राजी नहीं हो रही। रुचि अपनी जिद पर अड़ी रही। इसकी वजह से 13 फरवरी को तहसीलदार ने प्रतापगढ़ के रहने वाले एक बदमाश से रुचि सिंह का कत्ल करा दिया। तहसीलदार ने हत्या करने वाले युवक का कोई काम कराया था। घटना को छिपाने के लिए उसका शव नाले में फेंकवा दिया था।