रबी के सीजन में किसानों को फसलों की बोआई के साथ टॉप ड्रेसिंग के लिए खाद (उर्वरक) की कमी नहीं होगी। जिले के गोदाम व बिक्री केंद्रों में करीब 19 हजार मीट्रिक टन उर्वरक मौजूद है। खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए किसानों को अब अपनी खतौनी संग आधार कार्ड भी लेकर जाना होगा। खतौनी के हिसाब से लोगों को खाद मुहैया कराई जाएगी। कृषि विभाग समितियों के साथ ही अन्य उर्वरक बिक्री केंद्रों पर आपूर्ति करने में जुटा है।
अक्तूबर माह में अगैती धान कटाई के बाद किसान नवंबर व दिसंबर माह में आलू, मटर, सरसों व गेहूं समेत रबी सीजन की फसलों की बोआई करते हैं। रबी सीजन की फसलों की बोआई के समय फॉस्फेटिक उर्वरक, एनपीके के साथ ही डीएपी की अधिक जरूरत होती है।
बोआई व टॉप ड्रेसिंग के समय यूरिया की मांग अधिक रहती है। बोआई के समय जिले में किसानों की डीएपी समेत अन्य उर्वरकों की कमी ना हो, इसके लिए कृषि विभाग सक्रिय हो गया है। रबी सीजन में आवश्यक उर्वरकों का लक्ष्य निर्धारित करने के बाद गोदामों व बिक्री केंद्रों के साथ साधन सहकारी समिति, इफ्को बिक्री केंद्र व निजी विक्रेताओं तक नियमित उर्वरक आपूर्ति का खाका भी तैयार लिया है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिले में वर्तमान में मौजूद स्टॉक पर प्वाइंट आफ सेल मशीन से खतौनी व आधार बेस पर निर्धारित रेट पर किसानों को दिया जा रहा है।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. अश्वनी सिंह ने बताया कि जिले में रबी सीजन में आवश्यक डीएपी, यूरिया समेत अन्य उर्वरकों का स्टॉक है। सीजन में खाद की आपूर्ति नियमित है, किसानों को नियम से वितरित भी कराई जा रही है। वितरण की निगरानी के लिए कंट्रोल रूम बनाया किया है।
फसलों में उर्वरक प्रयोग की निर्धारित मात्रा
(प्रति किलोग्राम प्रति एकड़)
फसल यूरिया डीएपी एमओपी एएसपी एनपीके
गेहूं 95 52 27 150 80
सरसों 95 52 40 150 80
चना 09 52 13 150 75
मटर 09 52 13 150 75
आलू 143 70 67 156 100
इनसेट------
उर्वरक मौजूदा स्टॉक
डीएपी 7000 एमटी
यूरिया 12000 एमटी