उडैयाडीह क्षेत्र में की गई केले की खेती। संवाद
आंवले का गढ़ कहे जाने वाले प्रतापगढ़ में किसान अब केला उगाएंगे। उन्होंने केले की बागवानी भी शुरू कर दी है। 50 हेक्टेयर में केले के पौधे लगाए भी जा चुके हैं। किसान अब परंपरागत खेती से इतर व्यावसायिक खेती की ओर रुझान कर रहे हैं। इसके लिए उद्यान विभाग किसानों को जागरूक कर रहा है। अधिकारियों के मुताबिक 250-270 दिनों में केले के पौधे फल देना शुरू कर देते हैं। उन्होंने बताया कि राजकीय पौधशालाओं में 60 फीसदी की सब्सिडी पर उन्हें पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।
शासन ने उद्यान विभाग को इस वर्ष 50 हेक्टेयर में केले की बागवानी का लक्ष्य दिया था। उद्यान विभाग ने पट्टी के किसानों के बीच जागरूकता कार्यशाला का आयोजन कर उन्हें केले की बागवानी के लिए प्रेरित किया। इसके बाद क्षेत्र के 30 से 40 किसानों ने केले की बागवानी शुरू की। उन्हें शासन की ओर से 5.12 लाख रुपये वित्तीय सहायता भी दी गई है।
जिला उद्यान अधिकारी सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि जुलाई माह बागवानी का सबसे उपयुक्त समय होता है। बागवानी करते समय पौधों के बीच की दूरी 18 सेमी रखें। एक एकड़ में 1,234 पौधे रोपे जा सकते हैं। पौध लगाने से पहले गड्ढों में दस किग्रा सूखी गोबर की खाद, 180 ग्राम डीएपी, 250 ग्राम नीम केक और 20 ग्राम कार्बोफ्यूरान डालकर 25 दिनों के लिए छोड़ देना चाहिए। पौधरोपण के 30 दिन बाद यूरिया, अमोनियम, सुपर फास्फेट, यूरेट ऑफ पोटाश, जिंक का मिश्रण मिलाकर डालना चाहिए।
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0 एक हेक्टेयर केले की बागवानी से चार से छह लाख रुपये की आमदनी होती है। इस बार पांच हेक्टेयर में केले की बागवानी की है। पौधे भी बेहतर तरीके से तैयार हो रहे हैं।
अजय, उड़ैयाडीह।
0 उद्यान विभाग की ओर से केले की बागवानी के लिए जागरूक किया गया था। दो हेक्टेयर क्षेत्रफल पर केले की बागवानी की है। फल उत्पादन होने के बाद लागत और लाभ का पता चल सकेगा।
अंबुज, गोलापुर।
उडैयाडीह क्षेत्र में की गई केले की खेती। संवाद