जगेशरगंज के साधन सहकारी समिति गोबरी में डीएपी के लिए लगी किसानों की भीड़। संवाद
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आलू, सरसों, गेहूं की बुवाई के लिए किसानों को साधन सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं मिल पा रही है। डीएपी के लिए किसानों को सुबह से शाम तक लाइन में लगना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत मृतक किसानों के परिजनों को हो रही है। वरासत में नाम दर्ज न होने से उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है। दरअसल, लेखपालों ने मृतकों की जमीन पर उनके परिजनों के नाम पर नहीं की है।
इस बार किसानों को आधारकार्ड और खतौनी के साथ अंगूठा लगाने पर ही डीएपी दी जा रही है। शासन का मानना है कि इससे डीएपी की कालाबाजारी रुकेगी, मगर इस नियम से किसानों के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। संडवाचंद्रिका विकासखंड की साधन सहकारी समिति गोबरी में शुक्रवार को खाद का वितरण हो रहा था। किसान सुबह से ही लाइन में लग गए। देर शाम तक जब उनका नंबर आया तो पता चला कि लेखपाल ने अभी उनके नाम जमीन की वरासत नहीं की है।
इसके चलते क्षेत्र के राजेश यादव, मुकेश, राकेश समेत कई लोगों को बिना डीएपी के ही लौटना पड़ा। इस बार शासनादेश के अनुसार डीएपी उन्हीं को मिलेगी जिनके नाम खतौनी है। उनका अंगूठा लगेगा। लेखपालों की लापरवाही के चलते किसानों को खाद के लिए परेशान होना पड़ रहा है।