प्रतापगढ़। किसानों को फसलों की सिंचाई करने के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने को लेकर शुरू की गई मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की जिले के अफसरों ने हवा निकाल दी। जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते किसानों को इसका लाभ नहीं मिल सका। वर्ष 2014-15 में जिले को इस योजना के तहत 568.26 करोड़ मिले, मगर अफसर सही कार्ययोजना ही नहीं तैयार कर सके। सिंचाई एवं जलसंसाधन विभाग में अभी भी 2.30 करोड़ रुपये डंप हैं। अफसरों की इस लापरवाही के चलते केंद्र सरकार ने योजना के लिए दोबारा बजट ही नहीं भेजा। इससे यह योजना पूरी तरह ठप हो गई है।
केंद्र में मोदी सरकार के सत्तारुढ़ होने के बाद किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए बेहतर संसाधन मुहैया कराने को लेकर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना प्रारंभ की गई। इस योजना के तहत सिंचाई विभाग, उद्यान विभाग, कृषि विभाग, भूमि संरक्षण इकाई और सिंचाई तथा जल संसाधन विभागों से कार्ययोजना बनाने को कहा गया। सभी विभागों ने मिलकर लगभग पांच वर्ष के लिए लगभग ढाई हजार करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट केंद्र सरकार को भेजा। वर्ष 2014-2015 जिले को 568.26 करोड़ भेजकर योजनाएं प्रारंभ करने को कहा गया। इस योजना के पर्यवेक्षण के लिए कृषि विभाग को नोडल बनाया गया है।
केंद्र से धनराशि आते ही किसानों की फसलों की सिंचाई के लिए योजना बनाने वाले विभागों को मांग के अनुरूप धनराशि का आवंटन किया गया। उद्यान, कृषि और कृषि रक्षा इकाई को जो धनराशि मिली थी, उसे खर्च करने में दो वर्ष लग गए। जबकि सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग अभी तक 2.30 करोड़ रुपये नहीं खर्च कर पाया है। रुपये का सदुपयोग समय से नहीं होने से नाराज केंद्र सरकार ने जिले को दोबारा बजट ही नहीं दिया। इससे पांच साल के लिए बनी योजना पर ब्रेक लग गया। अगर अफसरों ने समय से धनराशि खर्च की होती तो अगले वित्तीय वर्ष में भी मांग के अनुरूप धनराशि मिलती, मगर अफसरों की लापरवाही का खामियाजा जिले के किसानों को भुगतना पड़ रहा है।