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Pratapgarh News: मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी संग ट्रामा सेंटर का होगा निर्माण

Fri, 04 Aug 2023 08:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
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गंभीर मरीजों का यहीं होगा इलाज, नहीं जाना पड़ेगा अन्यत्र
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वरुण श्रीवास्तव
प्रतापगढ़। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में आने वाले दिनों में ट्रॉमा सेंटर की सुविधा भी उपलब्ध हो जाएगी। शासन से इसके निर्माण के लिए हरी झंडी मिल गई है। साथ ही 30 बेड का इमरजेंसी वार्ड भी तैयार किया जाएगा। दोनों के लिए जगह चिह्नित कर ली गई है। ट्रामा सेंटर और इमरजेंसी की सुविधा के बाद गंभीर मरीजों को इलाज में सहूलियत होगी। लोगों को बेहतर इलाज के लिए प्रयागराज या फिर लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा।
डॉ. सोने लाल पटेल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में गंभीर तथा दुर्घटना में घायल मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं फिलहाल नहीं हैं। इस वजह से गंभीर मरीजों को गैर जिलों के सरकारी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। मरीजों की इस दिक्कत को देखते हुए कुछ माह पहले शासन ने मेडिकल कॉलेज में ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने के लिए प्रस्ताव मांगा था।
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पूर्व प्राचार्य डॉ. आर्य देश दीपक ने महिला अस्पताल की पुराने भवन को तोड़कर ट्रॉमा सेंटर निर्माण कराने के लिए प्रस्ताव भेजा था। शासन की ओर से ट्रामा सेंटर के साथ ही पुरुष विंग में इमरजेंसी तैयार करने के लिए अनुमति दे दी है। पुराने भवन को ढहाने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। सीएमएस डॉ. आरके पांडेय ने बताया कि शासन की ओर से ट्रॉमा सेंटर के साथ इमरजेंसी निर्माण के लिए हरी झंडी मिल गई है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा। औपचारिकताओं को पूरा करने की देरी है।
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तीन स्तर पर संचालित होंगी सेवाएं
सीएमएस डॉ. आरके पांडेय के मुताबिक राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में बनने वाला ट्रामा सेंटर अत्याधुनिक तकनीकी क्षमता से लैस होगा।इसे तीन हिस्सों में विभाजित कर रोगवार विभाग बनाकर मरीजों उपचार किया जाएगा। ट्रामा के एक हिस्से में टॉक्सीकोलॉजी यूनिट होगी। जिसमें जहरखुरानी से लेकर सर्पदंश या अन्य तरह के जहर के शिकार होने वाले मरीजों का उपचार किया जाएगा। दूसरे हिस्से में बर्न यूनिट संचालित होगी। जिसमें किसी भी माध्यम से जल जाने वाले मरीजों का उपचार किया जाएगा। तीसरे हिस्से में दुर्घटनाओं में घायल होने वाले मरीजों का उपचार किया जाएगा। बर्न व टॉक्सीकोलॉजी यूनिट बीस-बीस तथा ट्रॉमा यूनिट में तीस बेड होंगे। चिकित्सक व पर्याप्त संख्या में पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती भी की जाएगी।
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ये सुविधाएं होंगी खास
यहां वेंटीलेटर, मॉनीटर, सेंट्रलाइज ऑक्सीजन, इंफ्यूजन पंप और ओटी की सुविधा होगी। वहीं प्लास्टर रूम भी होगा। इसके अलावा चौबीस घंटे एमआरआई, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी और सीटी स्कैन की भी सुविधा होगी।
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यह है ट्रामा सेंटर की सुविधाएं
हादसों में गंभीर रूप से घायल हेड इंजरी, फ्रैक्चर और जले हुए मरीजों को तत्काल इलाज मुहिया कराने के लिए ट्रामा सेंटर की जरूरत होती है। एमसीआई (मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया) ने ट्रामा सर्विस को एक स्पेशिलिटी सर्विस के रूप में मान्य किया है। इसमें एक ही छत के नींच आर्थोपेडिक, न्यूरोसर्जरी, बर्न, कार्डियक और प्लास्टिक सर्जरी जैसे एक्सपर्ट डॉक्टर और डायग्नोसिस फेसिलिटी की सुविधा होती है।
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ट्रामा सेंटर के मानक
ट्रामा सेंटर में मेडिसिन, सर्जरी, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, आर्थोपेडिक्स, डेंटिस्ट्री, रेडियोलॉजी, एनीस्थिसिया विशेषज्ञ डॉक्टर होने चाहिए। साथ ही वर्किंग ऑपरेशन थिएटर, क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट, ट्रांसपोर्टेबल वेंटीलेटर, सीटी स्कैन, ब्लड स्टोरेज यूनिट, पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन, सेंट्रल ऑक्सीजन लाइन, पैथोलॉजी, ईको कार्डियोग्राफी व ईसीजी जांच की मशीन होनी चाहिए।
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