जिसमें एक जिला स्तरीय अधिकारी, बीडीओ, तहसीलदार और खंड शिक्षा अधिकारी शामिल हैं। समिति के सदस्य ब्लाकों पर मौजूद रहकर पक्ष और विपक्ष की प्रतिक्रिया सुनने और अभिलेखों का सत्यापन करने के बाद ही चयन पर मुहर लगाएंगे। जिले के 1193 ग्राम पंचायतों में एक -एक पद सृजित किए गए हैं, जबकि आवेदन करने वालों की संख्या 12,030 है। फिलहाल प्रधानों ने जिस आवेदक का चयन किया है, उसके सभी अभिलेखों की जांच और निवास की जांच करने के बाद ही चयन को अंतिम रुप दिया जाएगा। फिलहाल डीएम की इस पहल से डीपीआरओ का बोझ हल्का हो गया है।
प्रधानी के चुनाव के बाद फिर दिखी गुटबाजी
जिले के अधिकांश ग्राम पंचायतों में प्रधानी के चुनाव के बाद एक बार फिर गुटबाजी देखने को मिल रही है। प्रधान अपने करीबियों को करना चाह रहे हैं, तो विरोधी प्रधान को नीचा दिखाने के लिए दूसरे के चयन करने का खेल कर रहे हैं। यही वजह है कि ग्राम पंचायतों से शिकायतें अधिक आ रही हैं।
पंचायत सहायकों की तैनाती में पूरी तरह पारदर्शिता बरतने के लिए डीएम ने सभी ब्लाकों में जिला स्तरीय अधिकारियों के नेतृत्व में चयन समिति का गठन किया गया है। सभी विवादों का निपटारा और अभिलेखों का सत्यापन करके चयन समिति अपना फैसला सुनाने के बाद अनुमोदन किया जाएगा। रविशंकर द्विवेदी, डीपीआरओ