जनपद के सरकारी अस्पतालों में तीन साल पहले तैयार किए गए डेंगू वार्ड किसी काम के नहीं साबित हुए। इन वार्डों में अब तक एक भी मरीज को भर्ती नहीं कराया जा सका है। अभी तक सरकारी अस्पतालों में जांच की व्यवस्था नहीं थी। अब जिला अस्पताल में किट के माध्यम से जांच जरूर होने लगी है, मगर स्वास्थ्य महकमा ही इस रिपोर्ट को सही मानने के लिए तैयार नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के मुताबिक अब तक जिले में डेंगू के 24 मरीज सामने आए हैं, जिन्हें रेफर कर दिया गया। इन आंकड़ों से इतर दर्जनों की संख्या में संदिग्ध बुखार के मरीज मिले, जिन्हें डाक्टरों ने सीधे रेफर कर दिया।
संदिग्ध मरीजों की प्राथमिक जांच के लिए जिला अस्पताल में किट मंगवाई गई है। मरीजों को भर्ती कर इलाज करने के लिए जिला अस्पताल में दस तो सभी सीएचसी में पांच-पांच बेड के अतिरिक्त डेंगू वार्ड तैयार किए गए हैं। समय-समय पर फागिंग और डेंगू से बचाव के लिए अभियान चलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को आदेश है, मगर जिले में डेंगू से बचाव के लिए स्वास्थ्य महकमा कुछ नहीं कर रहा है।
हद तो यह है कि सरकारी अस्पताल में होने वाली जांच को उनके ही चिकित्सक मानने को तैयार नहीं हैं। इसलिए जांच में पुष्टी होने के बाद भी चिकित्सक भर्ती नहीं करते हैं। ऐेसे मरीजों को प्रयागराज रेफर कर देते हैं। स्वास्थ्य विभाग कागज पर फागिंग करता है। बचाव के अभियान भी हवा में चल रहे हैं।
खुद स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से अब तक 24 मरीज डेंगू से पीड़ित पाए गए हैँ। बीते सप्ताह भर से बुखार के दर्जनों संदिग्ध मरीजों को डाक्टरों ने प्रयागराज रेफर कर दिया। इसका कोई रिकार्ड विभाग बताने के लिए तैैयार नहीं है। जिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी में तैयार किए गए वार्डों में अभी तक एक भी मरीज को भर्ती नहीं किया जा सका है।
इससे डेंगू से पीड़ित लोगों को प्रयागराज जाना पड़ता है। पट्टी और कुंडा क्षेत्र में लगातार डेंगू के मरीज मिल रहे हैं। जानकारी होने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम बस पीड़ित मरीज के घर के आसपास फागिंग कर लौट आती है।
वार्ड बना है, मरीज आते हैं तो भर्ती किया जाता है। वैसे डेंगू के मरीजों की किट से हम जांच कराते हैं। लक्षण मिलने पर सही जाच रिपोर्ट के लिए मेडिकल कॉलेज भेज देते हैं। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सक जांच कराने के बाद मरीज को भर्ती कर इलाज शुरू कर देते हैं। डेंगू की जांच के लिए जो मशीन होनी चाहिए, वह हमारे पास नहीं है। डॉक्टर इम्तियाज अहमद, सीएमएस, जिला अस्पताल।
डेंगू बुखार की चपेट में जो भी लोग आए हैं उनमें ज्यादातर लोग परदेश में रहते हैं। बीमार होने पर वे घर आते हैं। जब तक डॉक्टर उनकी बीमारी को समझ पाते हैं और जांच कराते हैं तब तक मरीज की हालत नाजुक हो जाती है। ऐसे में मरीजों को प्रयागराज रेफर कर दिया जाता है। जहां चिकित्सक जांच कराने के बाद इलाज करते हैं। हमें रिपोर्ट देते हेें। फागिंग लगातार कराई जा रही है। तराई इलाके में ज्यादा डेंगू के मरीज पाए जा रहे हैँ। डॉक्टर, एके श्रीवास्तव, सीएमओ।