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अस्पताल में भर्ती मरीजों को डेंगू का खतरा

Tue, 30 Oct 2018 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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प्रतापगढ़ - फोटो : प्रतापगढ़
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 जिला व महिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को भी डेंगू होने का खतरा है। दोनों अस्पतालों में गंदगी का अंबार है। वार्डों में लगीं खिड़कियां टूट गई हैं। जालियां लगाई नहीं गई हैं। ऐसे में वार्ड में भर्ती मरीजों का दिन में भी मच्छर खून चूस रहे हैं। सीएमओ कार्यालय के बाबू के डेंगू की चपेट में आने के बाद मरीज और उनके तीमारदार सहमे हुए हैं।
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जिले में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। अब तक 18 लोग चपेट में आ चुके हैं। यह वह आंकड़ा है जो स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में दर्ज है। इसके अलावा भी जिले के कई पीड़ित लखनऊ और इलाहाबाद में इलाज करा रहे हैं। सीएमओ कार्यालय में बैठने वाले लिपिक गंगा श्रीवास्तव भी डेंगू की चपेट में आ गए। उधर, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी अशोक कुमार सिंह, अजीत नगर निवासी धीरेंद्र उर्फ धीरू समेत 18 लोगों को इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इनमें दो लोगों की मौत हो गई। स्वास्थ्य कर्मचारी को डेंगू होने की सूचना के बाद से जिला व महिला अस्पताल में भर्ती मरीज सहमे हैं। दोनों अस्पतालों में गंदगी का अंबार लगा है।

जिला अस्पताल के सर्जिकल मेल, चिल्ड्रेन और मेडिकल वार्ड के पीछे गंदगी का अंबार लगा है। तीनों वार्डों की खिड़कियां टूटी हुई हैं। इतना ही नहीं वार्ड में मच्छर प्रवेश न कर सकें, इसके लिए खिड़कियों पर जाली तक नहीं लगाई गई है। मरीजों को मच्छरों से राहत दिलाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में इन वार्डों में भर्ती मरीज परेशान हैं। विभाग के जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। यही हाल जिला महिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड का है। सर्जिकल वार्ड की खिड़कियां टूटी हुई हैं। दिन-रात मच्छर मरीजों के कान के ऊपर भनभनाते रहते हैं।
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जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड के नीचे कूड़ा डंपिंग जोन बना हुआ है। करीब दो माह से यहां डंप कूड़े को नहीं हटाया गया है। इसके चलते एक ओर जहां दुर्गंध उठती है वहीं दूसरी ओर मच्छर पनप रहे हैं। डेंगू वार्ड के सामने स्थित नाली चोक हो गई है। जलभराव के चलते मच्छर पनप रहे हैं। अस्पताल परिसर में गंदगी का अंबार लगा है। यही हाल जिला महिला अस्पताल का भी है।


सर्जिकल वार्ड के पीछे झाड़िया उग आई हैं। इसके चलते मच्छर और पनप रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी खामियां छिपाने के लिए उस पर पर्दा डालने का प्रयास किया है। मच्छरों से राहत पाने के लिए तीमारदारों ने टूटी हुई खिड़की में पालिथीन बांध दी है। अस्पताल के सीएमएस, सीएमओ और डीएम का ध्यान कभी इस ओर नहीं पड़ता है।


गुटका और पान खाने वाले मरीजाें के साथ आने वाले उनके तीमारदार खुद जाली तोड़ देते हैं। पांच माह पहले जिला अस्ताल के सभी वार्डों में खिड़कियों में जाली लगवाई गई थी। जल्द ही फिर से जाली लगवा दी जाएगी। नगर पालिका कर्मचारी डंपिंग जोन से कूडा उठाने के लिए नहीं आते हैं। इसके लिए लिखापढ़ी की गई है।  
योेगेंद्र यति, सीएमएस, जिला अस्पताल।


मैं पांच दिन के लिए ट्रेनिंग पर लखनऊ आया हूं। लौटकर आने के बाद जांच कर वार्डों की सभी खिड़कियों में जाली लगवाई जाएगी। फोन कर एक बार अस्पताल परिसर में दवा का छिड़काव करा दिया जा रहा है। जिससे मच्छर मर जाएंगे।
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एके श्रीवास्तव, सीएमओ।
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