दोस्त के साथ कोर्ट मैरिज करने जा रहे युवक को मोबाइल पर बात करने के चक्कर में जान गंवानी पड़ी। बाइक पर पीछे बैठा उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। खबर मिलने पर पहुंचे परिजन शव लेकर घर चले गए। देर रात शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
रानीगंज थाना क्षेत्र के शाहपुर निवासी विनोद कुमार मौर्या (32) पुत्र राम प्यारे मौर्या गुरुवार को अपने दोस्त तिवारी प्रीतमपुर निवासी सूरज (20) पुत्र शिवमूरत के साथ बाइक से शहर आ रहा था। वह लखनऊ-वाराणसी राजमार्ग से होते हुए राजापुर के करीब पहुंचा। तभी उसके मोबाइल पर किसी का फोन आ गया। वह बाइक चलाते हुए जेब से मोबाइल निकालकर बात करने लगा। तभी सामने से टेंपो आ गया। उससे बचने के फेर में विनोद ने बाइक से नियंत्रण खो दिया। बाइक अनियंत्रित होकर पलट गई।
इससे विनोद और सूरज गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास के लोगों ने दोनों के परिजनों को घटना की जानकारी देने के बाद जिला अस्पताल भेजा। जहां डाक्टरों ने विनोद को मृत घोषित कर दिया। विनोद के घायल साथी ने बताया कि वे दोनों कचहरी जा रहे थे। जहां विनोद कोर्ट मैरिज करने वाला था, लेकिन शायद ईश्वर को यह मंजूर नही था। कुछ ही देर में अस्पताल पहुंचे परिजन विनोद का शव लेकर घर चले गए। देर शाम शव का अंतिम संस्कार कर दिया। परिजनों के साथ ही गांव के लोग कोर्ट मैरिज की बाबत मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं। एसओ रानीगंज ने बताया कि हादसे की जानकारी मिली थी, पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक घायल जिला अस्पताल जा चुके थे। जब परिजन कोई कार्रवाई नहीं चाहते तो वह क्या कर सकते हैं।
बेटी साक्षी को मां की ममता देने के लिए विनोद कोर्ट मैरिज करने के लिए गुरुवार को घर से निकला था। उसे शायद यह आभास भी नहीं था कि उसकी हसरत पूरी नहीं हो सकेगी। तीन साल पहले मासूम साक्षी के सिर से मां का साया छिन गया था। अपनी लाडो की परवरिश वह मजदूरी करके किया करता था। साक्षी को मां की कमी खटकती रहती थी। इसलिए उसने कोर्ट मैरिज करने के लिए मन बनाया। ईश्वर ने मासूम साक्षी से मां की ममता तो छीनी ही साथ ही पिता का साया भी छीन लिया। बूढ़े माता पिता का सहारा भी छिन गया।
रानीगंज थाना क्षेत्र के शाहपुर निवासी विनोद कुमार ने चार साल पहले इलाहाबाद के हंडिया की रहने वाली पूनम से विवाह किया था। शादी के एक साल बाद साक्षी का जन्म हुआ। शादी के चार साल बाद दूसरे बच्चे को जन्म देने के दौरान पूनम की मौत हो गई। कुछ दिनों बाद परिवार के लोगों के समझाने पर विनोद ने दूसरी शादी मछलीशहर की रहने वाली युवती से की। वह एक साल बाद ही छोड़कर चली गई। इससे साक्षी व बुजुर्ग माता पिता की सेवा करने में समस्या होती थी। परिवार के लोगों के अलावा रिश्तेदारों ने उसकी तीसरी शादी पृथ्वीगंज के पास तय कर दी। युवती के परिजनों ने शादी करने के लिए कोर्ट मैरिज की शर्त रखी थी। बेटी के लिए वह गुरुवार को कोर्ट मैरिज करने कचहरी आ रहा था।
विनोद की माली हालत बहुत खराब थी। वह मजदूरी कर परिवार के गुजर बसर का बंदोबस्त कर पाता था। गुरुवार को कोर्ट मैरिज में होने वाला खर्च वहन करने के लिए उसके पास रुपये नहीं थे। इसलिए उसने अपने करीबियों से रुपया उधार लिया। इसके बाद साथी सूरज को लेकर कचहरी की ओर चल पड़ा। रास्ते में उसकी मौत झपट पड़ी।