जिले के 5600 अधिवक्ताओं के लिए खुशखबरी है। तीन साल पहले रजिस्ट्रेशन कराने वाले वकीलों को अब प्रतिमाह सरकार पांच-पांच हजार रुपये देगी। सूबे में अगर कोई अधिवक्ता कोरोना पीड़ित मिलता है तो उसका इलाज मुफ्त कराया जाएगा। योगी सरकार के नए फैसले में परीक्षा पास करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।
लॉकडाउन के चलते 29 दिन से जिला अदालतों और तहसील में ताला लटक रहा है। इससे वकीलों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया की पहल पर योगी सरकार ने अब तीन वर्ष पहले रजिस्ट्रेशन कराने वाले वकीलों को पांच-पांच हजार रुपये सीधे खाते में भेजने का फैसला किया है।
साथ ही कोरोना पीड़ित वकीलों का मुफ्त इलाज कराने की घोषणा की है। योगी सरकार की इस पहल से जिला कचहरी और तहसीलों में वकालत करने वाले 5600 अधिवक्ताओं को राहत राशि मिलेगी। योगी सरकार ने वकीलों की मदद के लिए पहले ही हाथ बढ़ाया था, मगर यह प्रतिबंध लगा दिया था कि इसके अर्ह वही वकील होंगे, जो परीक्षा को पास करेंगे।
मगर मंगलवार को हुए निर्णय के मुताबिक परीक्षा पास करने की अनिवार्यता अब समाप्त कर दी गई है। योगी सरकार के इस फैसले पर जूनियर बार एसोसिएशन पुरातन के अध्यक्ष अयोध्या प्रसाद मिश्र ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि गुरुवार को नोटिस निकालकर सभी अधिवक्ताओं से आधारकार्ड, खाता नंबर और बार काउंसिल के प्रमाणपत्र की छायाप्रति मांगी जाएगी।
आयकर और वाणिज्य कर अधिवक्ता भी होंगे शामिल
जिले के वाणिज्य कर विभाग और आयकर विभाग में वकालत करने वाले अधिवक्ता भी इसका लाभ उठा सकेंगे। हालांकि इन कार्यालयों में कार्य करने वाले अधिवक्ताओं की संख्या बेहद कम है। फिलहाल अधिवक्ताओं को शासनादेश जारी होने का इंतजार है।
पहली बार मिलेगी आर्थिक सहायता
ऐसा पहली बार होगा जब जिले के अधिवक्ताओं को राहत राशि के रूप में आर्थिक सहायता मिलेगी। इसके पहले भी जूनियर अधिवक्ताओं को मानदेय देने की घोषणा हुई थी, मगर अब तक किसी भी अधिवक्ता को नहीं मिला था।