लॉकडाउन के बाद खेती-किसानी में जिले के लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। इसका नतीजा है कि इस बार खरीफ का दायरा जिले में तीन हजार हेक्टेअर बढ़ गया है। अकेले 15 सौ हेक्टेअर धान की अधिक खेती होगी। इसके अलावा मक्का, ज्वार, बाजारा, उरद, मूंग व अरहर का दायरा भी 15 सौ हेक्टेअर बढ़ गया है।
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जिले में खरीफ के सीजन में धान की खेती प्रमुखता से होती है। सभी इलाकों में किसान धान की खेती करते हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 128381 हेक्टेअर में खरीफ की फसलों की खेती होती है। जिसमें 95 हजार हेक्टेअर में धान की रोपाई होती है।
मक्का 587, ज्वार, 4022, बाजारा 11962, उरद 7662, मूंग 488 जबकि अरहर की खेती 8660 हेक्टेअर में की खेती होती है। कई सालों से जिले में खरीफ की फसलों का यही दायरा था, मगर कोरोना काल के दौरान यह रिकार्ड इस बार टूट गया है।
चना दाल
दिल्ली, मुंबई सहित बड़े महानगरों में कोरोना वायरस का खतरा बढ़ने से गांव के लोगों का रुझान खेती की तरफ बढ़ा है। इसका असर खरीफ की फसल पर देखा जा रहा है। पिछले साल 128381 के सापेक्ष इस बार खरीफ की फसल का दायरा 131466 हेक्टेअर हो गया है।
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लगभग 3 हजार 85 हेक्टेअर फसलों का दायरा बढ़ा है। सबसे अधिक 1500 हेक्टेअर धान की फसल में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा उरद, मूंग, बाजारा, ज्वार, अरहर की फसलों का के दायरे में भी 1500 हेक्टेअर की बढ़ोतरी हुई है।
wheat and mustard
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खरीफ की फसलों का दायरा बढ़ा है। सांगीपुर, संडवाचंद्रिका, कोहड़ौर, उदयपुर सहित कई अन्य क्षेत्रों मेें धान की की खेती पिछले वर्षों के मुकाबले ज्यादा क्षेत्रफल में होगी। आमतौर इन इलाकों में धान की फसलों की रोपाई कम होती थी। उन्होंने बताया कि इस बार फसलों की पैदावार भी अच्छी होगी।
डा. अश्वनी सिंह, जिला कृषि अधिकारी