श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भक्ति धाम मनगढ़ में गेट पर तैनात पुलिस। संवाद
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भक्तिधाम मनगढ़ में इस बार श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम नहीं होगी। कार्यक्रमों में कमी के साथ ही मंदिर को कोरोनों के चलते बंद किया गया है। बाहर से आने वाली दुकानें भी इस बार नहीं लग पाएंगी। भक्तिधाम को भव्यता प्रदान करने वाला भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव कार्यक्रम पर भी इस बार कोरोना का ग्रहण लग गया है। इसके चलते इस बार जन्माष्टमी पर मंदिर पर लोगों को भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन नहीं हो सकेंगे।
कुंडा के मनगढ़ में जगद्गुरु कृपालु जी द्वारा स्थापित भक्तिधाम मंदिर में इस बार जन्माष्टमी को लेकर चहल-पहल नहीं दिख रही। आम लोगों के दर्शन के लिए मंदिर के दरवाजे दो दिन के लिए बंद कर दिए गए हैं। हालांकि अन्य जगहों पर सशर्त दर्शन पूजन किया जा रहा है लेकिन सुरक्षा के मद्ददेनजर भक्तिधाम मनगढ़ में दर्शनार्थियों के लिए पूजा पाठ और दर्शन रोक दिया गया है। अगस्त में 30 व 31 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मनाया जाना था लेकिन अब इस बार यह संभव नहीं हो पाएगा।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भक्तिधाम में लाखों की भीड़ होती थी। जिले ही नहीं प्रयागराज से भी लोगों को संभालने के लिए पुलिस बुलानी पड़ती थी। हर तरफ लोग ही दिखते थे। रात में घंटो रोड भी जाम हो जाता था। मंदिर में सजावट पखवारे भर पहले से ही शुरू हो जाती थी। इसके चलते लोगों का आना जाना भी हफ्ते भर से बढ़ जाता था। पूरे हफ्ते लोगों की भीड़ का फायदा स्थानीय व्यवसायियों को मिलता था। वह इन पूरे हफ्ते तमाम तरह की दुकानें लगाते थे।
इस पूरे हफ्ते उन्हें अच्छी आमदनी भी होती थी लेकिन इस बार भी दुकानों का तो सूनापन रहेगा ही लोगों में जन्माष्टमी की खुशी का भी सूनापन रहेगा। इस बार कोरोना के बढ़त प्रभाव को देखते हुए मंदिर को जन्मोत्सव के दो दिन बंद कर दिया गया है। मंदिर प्रशासन के हिरण्यमय चटर्जी का कहना है कि कोरोना के कारण इतना बड़ा आयोजन करना संभव नहीं है। श्रद्धालु दो दिन मंदिर बंद होने के नियमों का पालन करें।
लोगों को रोकने के लिए बनाए गए चारों तरफ आधा दर्जन से अधिक बैरियर
प्रशासन ने मंदिर में भीड़ को रोकने के लिए आधा दर्जन जगहों पर बैरियर लगाकर दर्शनार्थियों वापस करने का प्रयास किया। कुछ लोग किसी भी तरह से अंदर जाकर दर्शन करने के लिए लालायित भी रहे। सभी बैरियर पर सिपाही के साथ ही एक एसआई भी मौजूद रहे। इसके अलावा इंस्पेक्टर व सीओ भी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। मंदिर के मुख्य गेट पर एक दर्जन से अधिक सिपाही और एसआई लगे रहे। वह सभी को मंदिर बंद होने के बारे में बताते हुए उन्हें गेट से वापस जाने के लिए कहते रहे।