पिछले दिनों रूक-रूक कर हुई बारिश के बीच गिरे तापमान में शनिवार को एक बार फिर आसमान में बादलों ने डेरा जमा लिया। जिससे फसलों की चिंता में किसानों की धड़कनें बढ़ गई। बूंदाबांदी की आंशका से किसान परेशान रहे। किसानों में डर है कि बारिश हुई तो गेहूं की तैयार फसल की नुकसान हो सकता है। पहले ही बारिश व तेज हवा की वजह से सरसों की मड़ाई का काम ठप पड़ा हुआ है।
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15 से 20 फीसदी तक नुकसान
फौरी तौर किसानों को सरसों व गेहूं में 15 से 20 फीसदी तक नुकसान होने की आशंका है। अब यदि मौसम के मिजाज यूं ही रहे तो सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं की फसल को होने की आशंका है।
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मौसम का गड़बड़ाना चिंता का विषय
एमएमपीजी कॉलेज के कृषि विभागाध्यक्ष डॉ. रामलखन सिंह परिहार ने बताया कि मौसम बिगड़ रहा है और बारिश हुई तो फसलों को काफी नुकसान हो सकता है। बताया कि रबी फसलों में बोई जाने वाली फसलों की मार्च से अप्रैल माह में ही कटाई और मड़ाई होती है। जिले में लगभग 3.5 लाख हेक्टेयर में बोई गई फसलों में गेहूं की फसल अब पकने की कगार पर है। अप्रैल के प्रथम सप्ताह में कई क्षेत्रों में गेहूं की कटाई शुरू हो गई है। दो दिन पहले तक बढ़ा तापमान चिंता का विषय था, तो अब बारिश व हवाओं के बाद बदली छाना चिंता का सबब बना हुआ है। मौसम के गड़बड़ाने से किसानों का परेशान होना स्वाभाविक है।
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बारिश हुई तो घट जाएगी पैदावार
जिला कृषि अधिकारी अश्वनी सिंह ने बताया कि अभी तक गांवों से मिल रही सूचनाओं के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में कहीं कम कहीं ज्यादा नुकसान होने का आकलन किसान कर रहे हैं। पांच से 20 फीसदी उत्पादन प्रभावित होने की जानकारी किसान दे रहे हैं। नुकसान के सही आकलन के लिए टीमें कार्य कर रही है। शनिवार को बदली छाए रहने से फसलों को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। अब अगर बारिश होती है तो फिर पैदावार घटने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।