अगस्त माह में माध्यमिक विद्यालयों में शैक्षिक कैलेंडर जारी कर दिया गया है। यूपी बोर्ड ने मार्च माह में बोर्ड परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। ऐसे में बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने वाले बच्चों को पठन-पाठन के लिए सिर्फ चार महीने ही मिलेंगे। दरअसल, सितंबर से प्रारंभ होने वाली कक्षाएं दिसंबर माह में ठप हो जाएगी। जनवरी माह में प्रयोगात्मक परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी।
कोरोना काल में स्कूलों एवं कॉलेजों में पठन-पाठन प्रभावित हुआ है। शिक्षा सत्र 2019-2020 में कोरोना की पहली लहर में बोर्ड परीक्षा हो चुकी थी। कोरोना की दूसरी लहर में शिक्षासत्र 2020-2021 बुरी तरह प्रभावित हुआ। बोर्ड परीक्षाएं नहीं हो पाईं। संक्रमण का असर तेज होने से यूपी बोर्ड हाईस्कूल व इंटर के परीक्षार्थियों को प्रमोट कर दिया गया।
अप्रैल माह में शिक्षासत्र 2021-2022 की शुरुआत नहीं हो सकी। संक्रमण की वजह से ऑनलाइन कक्षाओं का दावा किया गया, मगर संसाधनों के अभाव के कारण यह व्यवस्था फेल हो गई। इससे पठन-पाठन समुचित रूप से शुरू नहीं हो सका। संक्रमण का असर कम होने पर अब 16 अगस्त से विद्यालय खुले गए हैं।
विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू है। इधर, माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से विद्यालयों में शैक्षिक कैलेंडर जारी किया गया है। अगस्त माह में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके बाद कक्षाओं का संचालन शुरू हो जाएगा। सितंबर से दिसंबर तक यानी चार महीने तक ही पठन-पाठन होगा। जनवरी माह में प्रयोगात्मक परीक्षाएं व प्रीबोर्ड परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी।
इसके बाद मार्च महीने में बोर्ड परीक्षाएं। शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार, बोर्ड परीक्षार्थियों को पठन-पाठन के लिए चार महीने का मौका मिलेगा। इतने कम समय में बोर्ड परीक्षा की तैयारी करना परीक्षार्थियों के लिए चुनौती से कम नहीं होगा। डीआईओएस डॉ. सर्वदानंद ने बताया कि शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार ही पठन-पाठन कराने का निर्देश जारी किया गया है।