परंपरागत खेती से इतर जिले के ऐशराज ने चार साल पहले ड्रैगन फल शुरू की। उन्होंने चार साल में 75 हजार की लागत लगाकर करीब तीन से चार लाख रुपये कमाए हैं। वर्तमान में वह एक बीघे में ड्रैगन फल की खेती कर रहे हैं। उन्होंने गुजरात से 110 पौधे मंगाकर खेती शुरू की थी। आज उनके पास करीब एक हजार ड्रैगन पौधे हैं। साथ ही वह आसपास के किसानों को ड्रैगन फल की खेती की बारीकियां बता रहे हैं।
विकासखंड शिवगढ़ के बधेवरा निवासी ऐशराज सरोज ने बताया कि उनके बड़े भाई वंशराज सरोज तमिलनाडु में रेलवे विभाग से डिप्टी कमांडेंट पद से रिटायर हुए हैं। तमिलनाडु में ड्रैगन फल की खेती की जानकारी होने पर पौधे लगाने की सलाह दी। उनके दूसरे बड़े भाई लक्ष्मीकांत सरोज मेरठ जिले में चकबंदी सीओ के पद पर कार्यरत हैं। वहां भी बड़े पैमाने पर ड्रैगन फल की खेती होती है और अच्छा मुनाफा भी मिलता है।
इसी को देखते हुए ऐशराज ने चार साल पहले 110 पौधे लगाकर खेती शुरू की। साल-दर-साल वह पौधों की संख्या बढ़ाते गए। वर्तमान में वह एक हजार पौधे लगाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक ड्रैगन फल की कीमत करीब 120 रुपये होती है। करीब एक साल में पौधे तैयार होकर फल देना शुरू कर देते हैं। फलों को अयोध्या की फल मंडी बेच दिया जाता है। बताया कि चार साल में करीब तीन से चार लाख रुपये ड्रैगन फल की खेती से प्राप्त हुए हैं।