महुली में जर्जर मकान की छत ढहने से एक ही परिवार के छह सदस्यों की मौत की घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। दूसरे दिन शुक्रवार की सुबह भी आंसुओं से लिपटी रही। रिश्तेदार और पड़ोसी बिलख रहे थे। दिनभर संवेदना प्रकट करने वालों का तांता लगा रहा। इधर, पूरे परिवार को खो देने के गम में अमन बेसुध पड़ा था। पुलिस और राजस्व विभाग की टीम भी डटी रही।
महुली में बुधवार की रात करीब डेढ़ बजे जर्जर पुस्तैनी घर की छत ढहने से उसके मलबे में अमन का पूरा परिवार दफन हो गया। बृहस्पतिवार की देर शाम पूरे परिवार का अंतिम संस्कार करने के बाद जब अमन घर लौटा तो उसके आंखों के आंसू नहीं थम रहे थे। अमन के लिए बृहस्पतिवार की रात बड़ी भारी थी। रातभर वह जगता रहा। रिश्तेदार व परिवार के लोग जुटे थे। सभी ढांढस बधा रहे थे लेकिन वह बस एकटक उसी मनहूस मकान को निहारता रहा और सुबह हो गई।
शुक्रवार की सुबह भी बृहस्पतिवार की तरह ही आंसुओं में लिपटी रही। सुबह सात बजे के बाद रिश्तेदार और जान पहचान के लोगोंं का आना शुरू हो गया था। लोग बिलख रहे थे। कोई मकान देख रहा था तो कोई अमन को। सबकी आंखें नम थीं। इधर, सुबह 10 बजे के बाद राजनीतिक दलों के नेताओं एवं समाजसेवी संगठनों के पदाधिकारियों के आने का सिलसिला शुरू हुआ।
सदर विधायक राजेंद्र कुमार मौर्य महुली पहुंचे। यहां उन्होंने अमन से मिलकर संवेदना प्रकट की। भाजपा नेता गोकुल नाथ श्रीवास्तव ने संवेदना जताई। इधर, दोपहर करीब 12 बजे अफसरों के साथ राज्य महिला आयोग की सदस्य प्रतिभा कुशवाहा ने अमन से मुलाकात कर संवेदना प्रकट की। हादसे की जानकारी से उनकी आंखें भी नम हो गईं। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने शोक संवेदना प्रकट की। इस दौरान अध्यक्ष राजेंद्र केसरवानी, आदर्श उमरवैश्य, मुन्ना सोनी, प्रभात सोनी आदि मौजूद रहे।
महुली पहुंचकर राजाभैया ने जताई संवेदना
प्रतापगढ़। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया ने शुक्रवार की शाम करीब छह बजे महुली पहुंच कर संवेदना प्रकट की। इस मौके पर बाबागंज विधायक विनोद सरोज, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि कुलदीप पटेल, दिनेश तिवारी, समाजसेवी रोशन लाल उमरवैश्य, विनोद यादव मौजूद रहे।
जब सवालों में घिरे लेखपाल
दुखद घटनाक्रम की जानकारी होने पर ओझला मोड़ की रहने वाली मैतुल निशा भी घटनास्थल पर पहुंचकर संवेदना प्रकट कर रही थीं। इस बीच उसे पता चला कि यहां लेखपाल भी आएं हैं। वह पूछते- पूछते उनके पास भी पहुंच गई और अपने जर्जर मकान का जिक्र करने लगी। कहा कि उसका मकान भी कभी गिर सकता है। पांच साल से आवास के लिए चक्कर लगा रही हूं, नहीं मिला। जब हादसा होता है, तभी दिखते हैं।
रुकिये, देख नहीं रहे बैरिकेडिंग है...
जिस मकान की छत गिरने से हादसा हुआ था, उसे प्रशासन ने बांस - बल्ली से घेर दिया था। वहां पुलिस की टीम तैनात थी। यहां आने वाले लोगों को पुलिस की टीम रोक रही थी।