छह हजार रुपये की नौकरी के लिए पूरी ताकत लगाने वाले पंचायत सहायकों का अब मोहभंग हो रहा है। ग्राम पंचायतों में तैनाती पाने के बाद उन्हें न तो काम मिल रहा है और न ही मानदेय का भुगतान किया जा रहा है। प्रधानों की चाकरी करने से हाथ खड़ा करने वाले पंचायत सहायक अब दूसरी नौकरी की तलाश रहे हैं।
जिले के 1193 ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायक की भर्ती के लिए विज्ञापन निकला, तो बीटेक, पॉलीटेक्निक के साथ ही ब़ीए, एमए करने वाले आवेदन करने के लिए पहुंच गए। गांव के वे युवा जो प्रयागराज और लखनऊ में रहकर तैयारी कर रहे थे, वे पंचायत सहायक की नौकरी करने के लिए गांव में आ गए। वह नेताओं और अफसरों से नौकरी दिलाने के लिए गिडगिड़ाते रहे। दरअसल में तैयारी करने वाले युवा यह सोच रहे थे कि गांव में नौकरी मिलेगी और छह हजार रुपये हर माह मिलेंगे।
इससे घर का काम भी होगा और नौकरी भी चलती रहेगी। नवंबर माह में तैनाती होने पर जब ग्राम पंचायत में पहुंचे तो पता चला कि उनके लिए कोई कार्य ही नहीं है। पंचायत सहायक की तैनाती गांव के ही व्यक्ति की हुई है, इससे प्रधान भी अपनी पोल खुलने की डर से उनसे कोई कार्य लेना नहीं चाहते हैं।
इधर ग्राम पंचायतों ने मानदेय का भुगतान करने से हाथ खड़ा कर दिया है। जो रुपये ग्राम पंचायतों को मिले हैं, उससे वह नाली, खडंजा बनवाने में लगे हुए हैं। ऐसे में पंचायत सहायकों का नौकरी से मोहभंग हो रहा है। अब वह शहर में जाकर तैयारी करने की योजना बना रहे हैं।
कंप्यूटर खरीदने के लिए मिले हैं 1.85 लाख
जिले की सभी ग्राम पंचायतों को कंप्यूटर उपकरण और फर्नीचर खरीदने के लिए 1.85 लाख रुपये मिले हैं। प्रधानों ने जो कंप्यूटर खरीदा, उसे पंचायत भवन में रखने के बजाय अपने घरों में रखे हुए हैं। जबकि यह उपकरण पंचायत सहायकों के लिए ही खरीदे जा रहे हैं।
जिले में तैनात पंचायत सहायकों को मानदेय भुगतान करने के लिए सभी सचिवों को निर्देश दिया गया है। ग्राम पंचायतों में जो धनराशि उपलब्ध है, उसमें से भुगतान करना है। रविशंकर द्विवेदी, डीपीआरओ