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जीएसटी पोर्टल में गड़बड़ी का खामियाजा भुगतेंगे 4500 व्यापारी

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रजीएसटी पोर्टल में आई गड़बड़ी से व्यापारियों को जोर का झटका लगा है। पोर्टल में आई खराबी से जिले के लगभग साढ़े चार हजार व्यापारियों को अब प्रतिदिन 40 रुपये की दर से विलंब का भुगतान करना होगा। रिटर्न दाखिल करने से वंचित व्यापारियों ने अफसरों से मिलकर विलंब शुल्क माफ करने की मांग उठाई है।
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जिले के पांच करोड़ से अधिक के टर्नओवर वाले व्यापारियों को प्रति माह जीएसटी आर-1 का रिटर्न भरना होता है। जबकि इससे कम टर्नओवर के व्यापारियों को तीन माह के अंतराल पर रिटर्न भरना होता है। बड़े व्यापारियों के लिए माह की दस तारीख अंतिम तिथि होती है। अधिकांश व्यापारी अंतिम दिन ही रिटर्न भरते हैं। 10 मई को जीएसटी पोर्टल में आई खराबी से जिले के लगभग साढ़े चार हजार व्यापारी रिटर्न भरने से चूक गए।
ऐसे में अब व्यापारियों को मजबूरी में प्रतिदिन 40 रुपये की दर से विलंब शुल्क देना होगा। दरअसल, जीएसटी में रजिस्टर्ड व्यापारी जो कंपोजिशन स्कीम में नहीं है, उन्हें हर माह की 10 तारीख तक संगत माह में अपनी बिक्री का विवरण जीएसटीआर-1 भरना होता है। इसके लिए पोर्टल पर एक टूल दिया गया है। इसे डाउनलोड करके व्यापारी एक्सल शीट में अपने सभी विवरण जैसे, बी2बी की बिक्री, बी2सी की बिक्री, डेबिट, क्रेडिट नोट की डिटेल तथा एचएसएन वाइज डिटेल्स तैयार कर उस टूल के माध्यम से जेसन फाइल तैयार करते हैं।
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इसी जेसन फाइल को जीएसटी पोर्टल पर अपलोड करता है, ताकि उसके खरीददार को खरीदे माल पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का सीधे लाभ मिल सके। कुछ दिन पूर्व पोर्टल पर नया अपग्रेडेड टूल दिया गया था। जिससे इस नए टूल के माध्यम से व्यापारी अपनी जेसन फाइल बना सके। लेकिन टूल के द्वारा जेसन फाइल बनाने पर बी2बी की बिक्री में एरर दिख रहा है। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष राजेंद्र कुमार केसरवानी के अनुसार जिले के 80 फीसदी व्यापारी अपना रिटर्न अंतिम 3 दिनों में ही दाखिल करते हैं।
अब जब व्यापारी अपना रिटर्न दाखिल करना चाहते हैं तो इस समस्या के कारण उनका रिटर्न अपलोड नहीं हो पा रहा। उन्होंने बताया कि अगर व्यापारी अपना रिर्टन दाखिल नहीं कर पाएंगे तो उनके खरीददार को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा। उन्होंने वाणिज्य कर विभाग के अफसरों से मिलकर यह मुद्दा उठाकर विलंब शुल्क से छूट दिलाने की मांग की है।
हर माह की दस तारीख को बड़े व्यापारियों को रिटर्न दाखिल करना होता है। अगर कोई नहीं कर पाया है तो, उसे प्रतिदिन 40 रुपये की दर से विलंब शुल्क देना होगा। राम भवन, उपायुक्त, वाणिज्य कर विभाग
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