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Pratapgarh News: 45 दिन का नियम, छह माह में नहीं मिल रही आर्थिक सहायता

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परिवार के मुखिया की असामयिक मौत पर भले ही 45 दिन में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का नियम है, लेकिन छह माह तक उनको पैसे नहीं मिल रहे हैं। जनपद के 254 परिवार के मुखिया की असामयिक मृत्यु के बाद आर्थिक सहायता की फाइल कार्यालयों में ही अटकी है। विभाग के मुताबिक बजट नहीं होने से आर्थिक सहायता नहीं हो पा रही है।
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परिवार के मुखिया की असामयिक मृत्यु होने पर समाज कल्याण विभाग की ओर से आश्रितों को पारिवारिक लाभ योजना के तहत 30 हजार तक आर्थिक सहायता दी जाती है। इस वर्ष 919 आवेदकों ने ऑनलाइन आवेदन किए थे। शासन ने दो करोड़ बजट समाज कल्याण विभाग को आवंटित किया था।
इतने कम बजट में महज 665 आवेदकों को ही लाभान्वित किया जा सका है। शेष 254 आवेदकों को बजट के अभाव में योजना का लाभ नहीं मिल सका है। समाज कल्याण विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजकर एक करोड़ 22 लाख रुपये बजट की मांग की है।
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शासन का निर्देश है कि ऑनलाइन आवेदन के बाद प्रशासन को 30 दिनों के भीतर आवेदन का निस्तारण करने के साथ आवेदकों को 45 दिनों के अंदर योजना का लाभ दिया जाना है। अधिक दिनों तक मामला लंबित होने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही भी तय की गई है।
समाज कल्याण अधिकारी ने नागेंद्र मौर्य ने बताया कि शासन से स्वीकृत बजट से 665 आवेदकों को लाभान्वित किया गया है। 254 आवेदकों के लिए एक करोड़ 22 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बजट स्वीकृत होने के बाद आवेदकों को वित्तीय मदद की जाएगी।

उनके पति परमेंद्र ही घर का खर्च चलाते थे। करीब एक साल पहले उनकी कैंसर से मृत्यु हो गई। पति की मृत्यु के बाद योजना का लाभ नहीं मिल सका है। उनके दो बेटे और एक बेटी पढ़ाई कर रही है। घर भी जर्जर हो ढहने के कगार पर पहुंच चुका है। घर का खर्च चलाने के लिए सरोज चौराहा स्थित एक नर्सरी में तीन हजार की नौकरी करती हूं। संध्या, देवकली
पति बबलू की मौत हार्ट अटैक से हो गई थी। अब रसोइया की नौकरी करती हूं। समय से मानदेय भी नहीं मिलता है। घर का खर्च चलाने के लिए बेटा बाइक एजेंसी काम करता है। उन्होंने बताया कि विकास भवन जाने पर आवेदन में कई तरह की समस्याएं बताकर वापस कर दिया जाता है। सुमन, कजियाना मोहल्ला
ये है योजना
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार के मुखिया की मृत्यु होने जाने के बाद आश्रितों को 30 हजार आर्थिक सहायता दी जाती है। आवेदक की वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्रों में 46 हजार व शहरी क्षेत्रों में 56 हजार रुपये वार्षिक होनी चाहिए। मुखिया की मृत्यु के एक साल के अंदर योजना के लिए आवेदन करना होता है।
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