बदायूं गैंगरेप मामले में वादी पक्ष की तहरीर में भी संदिग्ध माने गए चर्चित उपनिरीक्षक गंगा सिंह को डीजीपी के आने के बाद भी किसी बड़ी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा। उसहैत से हटाकर महज 30 किमी दूर सदर कोतवाली भेज दिया गया।
सपा सरकार बनने के बाद फैजगंजबेहटा थाने में लंबी तैनाती के दौरान कई मामलों में चर्चित रहे एसओ गंगा सिंह यादव को अपने चुनिंदा स्टाफ के खिलाफ एक लफ्ज भी सुनना गवारा नहीं है। मुंह लगे सिपाही स्याह करें या सफेद, वह उसे सही मानते हैं। शायद इसीलिए वह खुद अधिकांश मामलों में एक पक्ष की भूमिका में खड़े हो जाते हैं।
उसहैत थाना क्षेत्र के कटरा सआदतगंज में दो किशोरियों से रेप और फांसी लगाकर उनकी हत्या के चर्चित मामले में जहां एक हेड कांस्टेबल और एक सिपाही बर्खास्त हो गया और कटरा सआदतगंज चौकी प्रभारी निलंबित हो गए, वहीं गंगा सिंह यादव पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह तब, जबकि तहरीर के मुताबिक गंगा सिंह यादव भी बराबर के दोषी आंके गए थे। जिला प्रशासन की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में भी एसओ की भूमिका पर सवाल खड़ा किया गया था।
पीड़ित परिवार को धमकाते हैं गंगा सिंह
आला अफसर भी अनौपचारिक रूप से एसओ की शिथिलता और विवादित कार्यशैली की बात मानते थे पर लगता था कि कोई अदृश्य शक्ति एसओ के खिलाफ फैसला लेने से उन्हें रोक रही थी। माना जा रहा था कि डीजीपी के आने पर कम से कम एसओ पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है। बावजूद केवल उनका सदर कोतवाली में ट्रांसफर कर इतिश्री कर ली गई।
सूत्र बताते हैं कि सत्तापक्ष के जिले के एक बड़े सजातीय नेता का वरदहस्त उनके ऊपर है। मामला ठंडा पड़ने के बाद उन्हें फिर किसी बड़े थाने का चार्ज दे दिया जाएगा।
इस बीच पीड़ित परिवार के लोग भी गंगा सिंह पर आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि वह अभी भी किसी न किसी बहाने से गांव आ जाते हैं और बयान लेने के बहाने भी उन्हें धमकाते हैं।
कटरा सआदतगंज में डीजीपी का दौरा
किशोरियों-महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न और हत्या की लगातार बढ़ रही वारदातों से प्रदेश की सपा सरकार घिरती जा रही है।
कटरा सआदतगंज में दो किशोरियों से रेप और हत्या के चर्चित कांड के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आदेश पर यहां पहुंचे प्रदेश पुलिस के मुखिया एएल बनर्जी ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार गंभीर है। ऐसी वारदातों के आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
पीड़ित परिवार का दर्द समझने और सीबीआई जांच का मांगपत्र लेने के बाद डीजीपी ने घटना से संबंधित सभी स्थानों का मुआयना किया। डीजीपी ने पीड़ित परिवार के लोगों से घटना की सिलसिलेबार जानकारी ली। घटना के चश्मदीद गवाह बाबूराम उर्फ नजरू को साथ लेकर वह जगह भी देखी, जहां नजरू की अभियुक्त पप्पू से हाथापाई हुई थी। डीजीपी ने परिवार के लोगों और चश्मदीद गवाह के बयानों की रिकार्डिंग भी कराई।
'गैंगरेप के आरोपियों को दिलाएंगे कड़ी सजा'
पत्रकारों से बातचीत में डीजीपी ने कहा कि यह काफी दुखद घटना है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इन्हें कड़ी सजा दिलाई जाएगी। पीड़ित परिवार की पुलिस-प्रशासन हरसंभव मदद कर रहा है। पुलिस तेजी से विवेचना कर रही है लेकिन पीड़ित पक्ष चाहता है कि सीबीआई से विवेचना कराई जाए। लिहाजा सरकार ने इसकी संस्तुति कर दी है। केस के सभी नामजद आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। दो फरार आरोपियों के बारे में नामजदों से पूछताछ की जाएगी। गवाह बाबूराम की मदद से दोषियों के स्कैच भी तैयार किए जाएंगे।
इसके अलावा डीजीपी ने सरकार की प्राथमिकताओं का हवाला देते हुए बताया कि उनके कार्यालय में मुख्यमंत्री के आदेश पर विशेष महिला सेल बनाई गई है। इसमें तीन महिला आईपीएस अफसर तैनात की गई हैं, जिनमें से एक एडीजी स्तर और दो आईजी स्तर की अधिकारी हैं। महिला उत्पीड़न से संबंधित मामलों को यह सेल प्राथमिकता से निपटाएगी।
इस दौरान एडीजी अमलेंदु कुमार सेंगर, आईजी जकी अहमद और डीआईजी आरके सिंह राठौर और एसएसपी अतुल सक्सेना समेत पुलिस-प्रशासन के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।