विद्युत नियामक आयोग ने वर्ष 2013-14 के लिए बिजली दरें बढ़ाने के बिजली कंपनियों के प्रस्ताव को रद कर दिया है। आगामी वित्तीय वर्ष की बिजलीदरें आयोग स्वयं तय करेगा। इसके लिए प्रक्रिया भी तय कर दी है।
आयोग ने पावर कारपोरेशन को निर्देशित किया है कि वह 2013-14 के एआरआर प्रत्यावेदन के महत्वपूर्ण तथ्य और मुख्य विशेषताओं का विज्ञापन निकाले। इस पर आम लोगों के विचार, सुझाव, आपत्तियां और प्रत्यावेदन मांगे जाएंगे। आयोग ने इसके लिए 15 दिन का समय देने की व्यवस्था बनाई है।
पावर कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से आगामी वित्तीय वर्ष में बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया था। इन प्रस्तावों पर राज्य उपभोक्ता परिषद व अन्य की ओर से कई गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई र्गई थीं। परिषद ने टैरिफ प्रस्तावों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति वाले जिलों में केवल लखनऊ, नोएडा व गाजियाबाद को ही शामिल करने पर सवाल उठाया था। इटावा, मैनपुरी, संभल, कन्नौज, रामपुर, रायबरेली और अमेठी जैसे वीवीआईपी जिलों को छोड़ने पर आपत्ति जताई गई थी।
सप्लाई घंटे के आधार पर दरें तय करने पर भी आपत्ति उठाई गई थी। कहा गया था कि पॉवर कारपोरेशन स्वयं ही इसका पूर्व में विरोध कर चुका है और यह व्यावहारिक भी नहीं है। इसके अलावा सरकारी विभागों की बिजली दरें न बढ़ाने के प्रस्ताव को भेदभाव पूर्ण करार दिया गया था।
आयोग ने बिजली कंपनियों की ओर से बिना सीएजी ऑडिट रिपोर्ट के एआरआर (वार्षिक राजस्व आवश्यकता) प्रस्ताव पेश करने को अनुचित ठहराते हुए कंपनियों के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। अपीलीय प्राधिकरण पूर्व में निर्देश दे चुका है किटैरिफ प्रस्तावों के लिए सीएजी ऑडिट रिपोर्ट जरूरी है।
यह पहला मौका है जब बिजली कंपनियों केएआरआर प्रस्ताव को रद किया गया है। आयोग के अब इस फैसले पर सबकी नजर है कि अखबारों में जिन बिंदुओं पर आपत्तियां मांगी जाएंगी उसे आयोग तय करेगा या पावर कारपोरेशन।
-अवधेश कुमार वर्मा, उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष