उत्तर प्रदेश के सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है।
मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस पर सुनवाई के लिए 18 दिसंबर की तिथि तय की है।
याची आशुतोष गुप्ता की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता प्रदीप कुमार ने कहा कि अपराधी और माफिया राजनीति में दखल दे रहे हैं।
प्रदेश के दर्जनों सांसदों, विधायकों के खिलाफ दशकों से आपराधिक मुकदमे लंबित हैं। इनकी पूरी रिपोर्ट न्यायालय में मंगाई जाए।
याची का दावा है कि सपा के 111, बसपा के 29, भाजपा के 25, कांग्रेस के 13, आरएलडी के दो, आईएनडी के पांच, पीस पार्टी के दो, कौमी एकता के एक और एक अन्य विधायक के खिलाफ आपराधिक मुकदमा विचाराधीन है।
इनका ट्रायल लंबे समय से लटका है। हाईकोर्ट से इन मुकदमों का विचारण शीघ्र पूरा करवाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई।
महाधिवक्ता वीसी मिश्र ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह सरकार का अधिकार है और नियमानुसार की ही कार्रवाई की जानी चाहिए।
यह भी सवाल उठाया गया कि महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ मुकदमों की शीघ्र सुनवाई का आदेश है। बहुत से लोग जमानत न मिल पाने के कारण लंबे समय से जेलों में बंद हैं।
उनके मुकदमे भी जल्दी सुने जाने चाहिए। यह आपत्ति भी उठ सकती है कि सांसदों और विधायकों के मुकदमों को तरजीह देने के कारण अन्य लोगों के मुकदमों के निस्तारण में विलंब हो रहा है।
याची के अधिवक्ता का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट इस संबंध में निर्देश दे चुका है जिसका अध्ययन कर लिया जाए। पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए 18 दिसंबर की तिथि तय की है।