मथुरा में वसूली को लेकर हुए विवाद में मंगलवार को ट्रैक्टर चालक की मौत हो गई, जिसके बाद भड़के ग्रामीणों ने थाना घेर लिया। उन्होंने थाने में खड़े वाहनों को आग लगा दी और तोड़फोड़ की।
बवाल बढ़ता देख पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें इसमें पांच ग्रामीण घायल हो गए।
मामले में शेरगढ़ के थाना प्रभारी सहित 11 पुलिसकर्मियों पर हत्या की एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही थाना प्रभारी, एसआई सहित सात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
पुलिस ने मांगे थे 200 रुपए
मथुरा के थाना शेगरढ़ के गांव नौगांव के रतीराम का 22 वर्षीय पुत्र जीतू गांव के बच्चू, भूप सिंह के साथ ट्रैक्टर ट्रॉली से मंगलवार तड़के तूड़ी लेकर ईंट भट्टों पर जा रहा था।
आरोप है कि 6:30 बजे जब वह शेरगढ़ पुल से गुजर रहे थे, तभी शेरगढ़ थाने के सिपाही देवेन्द्र, मनमोहन सोलंकी, जितेंद्र, बबलू नागर और विश्वकर्मा ने उन्हें रोका और 200 रुपये देने को कहा।
जीतू ने रुपये नहीं दिए और ट्रैक्टर बढ़ा दिया। इससे बौखलाए पुलिसकर्मियों ने बाइकों से ट्रैक्टर का पीछा किया और जीतू पर गोलियां चला दीं। चलते ट्रैक्टर की स्टेयरिंग पकड़कर खींच लिया।
गोली लगने से घायल जीतू ट्रैक्टर के नीचे आ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इससे गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने थाना घेर लिया। भीड़ भड़क उठी और थाने में खड़े वाहनों को तोड़ शुरू कर दी, दो बाइकों में आग लगा दी।
थाने के कार्यालय में तोड़फोड़ की
पुलिसकर्मियों के आवास उनकी आधा दर्जन बाइक, चार पहिया वाहनों, और थाने के कार्यालय में तोड़फोड़ की गई। यहां भी वाहनों में आग लगा दी। पुलिस कर्मियों पर जमकर पथराव किया। थाने में एसओ के कक्ष में जमकर तोड़फोड़ की।
ग्रामीणों के तेवर देख पुलिसकर्मियों ने आसपास के मकानों में छुपकर खुद को बचाया और ग्रामीणों पर गोलियां चलाई। पुलिस की गोली लगने से पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
बवाल की सूचना पर आईजी आशुतोष पांडेय, जिलाधिकारी समीर वर्मा, एसएसपी प्रदीप कुमार मौके पर पहुंच गए। अपराह्न तीन बजे तक ग्रामीणों ने जीतू का शव पटेल चौक से उठने नहीं दिया।
पुलिसकर्मियों के निलंबन और उनके खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज होने के बाद ही ग्रामीणों का आक्रोश कुछ शांत हुआ। देर शाम आईजी आशुतोष पांडेय, कमिश्नर प्रदीप भटनागर, जिलाधिकारी समीर वर्मा, एसएसपी प्रदीप कुमार आदि अधिकारी उपस्थित मौजूद थे।