WTI's eyes on the safety of humans along with tigers in Terai
कलीनगर। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ समेत वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए डब्ल्यूटीआई (वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया) की टीम भी विशेष नजर रख रही है। इसके लिए वन्यजीवों की निगरानी से लेकर आमजन को जागरूक करने तक के प्रयास किए जा रहे हैं। पूर्व में कई मामलों में टीम के प्रयास सफल भी हुए हैं। डब्ल्यूटीआई के बॉयोलॉजिस्ट अमन भाटिया को अहम भूमिका दी गई है।
दरअसल, तराई टाइगर प्रोजेक्ट के तहत डब्ल्यूटीआई की टीम वन्यजीवों के साथ मानव वन्यजीवों संघर्ष के विषय पर काम कर रही है। जनपद के जंगल को वर्ष 2014 को टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया गया था। अनुकूल वातावरण होने के चलते बाघ और तेंदुओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। सीमित संसाधन होने के चलते शुरुआती वर्षों में हालात अधिक बिगड़े। जंगल से बाहर मानव वन्यजीव संघर्ष की ताबड़तोड़ घटनाएं सामने आईं। कई कारणों से बाघों की मौत भी हुई। इसके बाद अफसर गंभीर हुए।
हालात संभालने के लिए जरूरी प्रयास शुरू किए गए। वहीं, वाइल्डलाइफ से जुड़ी संस्थाएं भी आगे आई। तराई टाइगर प्रोजेक्ट की शुरूआत की गई। पीलीभीत टाइगर रिजर्व पर नजर रखने के लिए वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ने तीन सदस्यीय टीम को जिम्मेदारी सौंपी है। टीम ने जिम्मेदारी संभालने के बाद जमीनी हकीकत को परखना शुरू किया।
रैपिड रिस्पांस टीम की जिम्मेदारी अहम- बाघ समेत अन्य वन्यजीवों पर नजर रखने के लिए डब्ल्यूटीआई की रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है। इसमें वन्यजीवों की निगरानी और व्यवहार पर अध्ययन करने के लिए बॉयोलॉजिस्ट, वन्यजीवों के प्रति आमजन को जागरूक करने के लिए सोशलॉजिस्ट और ट्रेंक्युलाइज करने समेत अन्य जरूरत के लिए पशु चिकित्सक को तैनात किया गया है।
सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए गांवों से जुड़े लोग - वन्यजीवों की सुरक्षा को बेहतर करने के लिए प्राइमरी रिस्पांस टीम का गठन किया गया। टाइगर रिजर्व की प्रत्येक रेंज से जुड़े गांव से पांच लोगों को टीम में जोड़ा गया। इस समय करीब तीस सदस्य टीम में शामिल हैं। जिन्हें, वन्यजीवों की सूचनाओं को साझा करने के साथ ही स्थिति को संभालने की ट्रेनिंग भी दी गई है।