पीलीभीत। शारदा सागर से लगे गांव सेल्हा में जल्द ही स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिलाएं केले की तना से निकलने वाले रेशे से उपयोगी चोटी व उत्पाद तैयार करने के लिए उद्योग लगाएंगी। इसके लिए एनआरएलएम की ओर से गांव की चार महिलाओं को मशीनरी व उत्पाद तैयार करने के प्रशिक्षण के लिए छह दिन गोरखपुर भेजने की तैयारी की जा रही है।
जिले में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं खुद को आत्मनिर्भर बनाने की ओर खुद में आत्मविश्वास जगाकर अग्रसर कदम उठा रहीं है। अब पीलीभीत जिले में जलकुंभी से भी सुंदर केले के तने से तैयार होने वाले उत्पाद दिखेंगे। बता दें जिले के ग्राम सेल्हा जहां केले के पैदावार व वृक्ष ज्यादा हैं, यहां अब केले की तना से निकलने वाले रेशे का उद्योग एसएचजी महिलाओं के द्वारा लगाया जाएगा। इन रेशे की चोटी की कीमत बाजार में 60-350 रुपये किलो तक है। इसके लिए एनआरएलएम की ओर से 4 महिलाओं को गांव से गोरखपुर भेजा जा रहा है।
यह महिलाएं गोरखपुर में मशीन से केले की तने से रेशे निकालते हुए उसकी चोटी बनाना व उसके उत्पाद बनाना सीखेंगी। इसके बाद प्रशिक्षित महिलाएं गांव में आकर महिलाओं की एओपी तैयार व विभागीय सहयोग से मशीन खरीदेंगी व इस रेशे की तने से पर्स, कवर फाइल, पेन पॉर्ट, मेज कवर, हैंड बैग सहित अन्य तमाम उत्पाद बनाना सीखेंगी।
डीसी स्वत: रोजगार वंदना सिंह ने बताया इस प्रोजेक्ट में नाबार्ड का सहयोग मिलेगा जल्द ही महिलाओं को गोरखपुर भेजने की तैयारी की जा रही है। संवाद