पूरनपुर। बंगाली समाज के लोगों को उनकी जातीय वर्ण व्यवस्था के तहत प्रमाण पत्र जारी नहीं हो रहे हैं। इतना ही नहीं, उनको सामान्य जाति का भी न मानकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को जारी होने वाले ईडब्ल्यूएस का प्रमाण पत्र भी जारी नहीं किया जा रहा है। इससे बंगाली समाज के लोगों में रोष है। इसको लेकर आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।
वर्ष 1970 में सांप्रदायिक हिंसा पीड़ित पूर्वी पाकिस्तान से आए बांग्लाभाषियों को जिले में पुनर्वास कराया गया था। इन परिवारों को रहने के साथ खेती के लिए भी जमीन दी गईं। जिले की ग्राम पंचायत चंदिया हजारा, गभिया सहराई, रमनगरा सहित 27 ग्राम पंचायतों में करीब डेढ़ लाख बांग्लाभाषियों की आबादी और करीब 50 हजार मतदाता हैं। हिंदू वर्ण व्यवस्था के तहत इनमें भी जातियों का वर्गीकरण है। बांग्लाभाषियों को अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा आदि वर्ग के प्रमाण पत्र जारी नहीं हो रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र नहीं जारी हो रहे। इससे सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मिलने वाली सुविधा भी नहीं मिल रही।
इसको लेकर बांग्लाभाषियों में रोष है। पहले भी कई बार जन प्रतिनिधियों से समस्या का समाधान कराने की मांग की जा चुकी है। वरिष्ठ अफसरों को कई बार भेजे गए ज्ञापनों से भी समस्या हल नहीं हुई। अब जिले के बांग्लाभाषी इसके विरोध में आंदोलन की तैयारी रहे हैं। इसके लिए संपर्क शुरू कर दिया गया है। संवाद