फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गन्ने के लालच में आ रहे नेपाली हाथी

विज्ञापन
विज्ञापन
पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में कई दिनों से डेरा जमाए हाथियों को जंगल के साथ बाहर के क्षेत्र का भौगोलिक वातावरण रास आ रहा है। जंगल सीमा से सटे इलाके में लगी गन्ने और धान की फसल में निकल रहे फूलों की मिठास हाथियों को जंगल से बाहर की ओर रुख करने की वजह माना जा रहा है। फिलहाल कंपार्टमेंट-104 में डेरा जमाए हाथियों की निगरानी में टाइगर रिजर्व की कई टीमें जुटी हैं।
विज्ञापन

बहुत पहले से नेपाल की शुक्ला फंटा सेंक्चुरी के हाथी पीलीभीत जनपद की सीमा में घुसकर बराही रेंज के अंतर्गत शारदा नदी के पार स्थित लग्गा भग्गा के जंगल में डेरा जमाते आ रहे हैं। बराही रेंज का यह इलाका हाथियों के कॉरिडोर माना जाता है, लेकिन धीरे-धीरे क्षेत्र में अतिक्रमण का दायरा बढ़ने से जंगल नष्ट होने के साथ हाथियों का कॉरिडोर भी समाप्त हो गया। लेकिन पुराना इलाका होने के चलते हाथी लगातार इस पार अपनी आमद दर्ज कराते आ रहे हैं। इधर, पूर्व में नेपाली के करीब तीन दर्जन हाथी दुधवा नेशनल पार्क से पीलीभीत टाइगर रिजर्व की हरीपुर रेंज के रास्ते बराही और फिर महोफ रेंज की ओर निकल गए थे। हाथियों की आमद होने की भनक लगते ही टाइगर रिजर्व प्रशासन में अलर्ट जारी कर दिया गया। प्रयास कर हाथियों को उत्तराखंड की सुरई रेंज की ओर खदेड़ा गया, लेकिन हाथी फिर पीलीभीत टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज में पहुंच गए। इसके बाद माला के जंगल की ओर रुख कर उत्पाद भी मचाया। विशेषज्ञों के मुताबिक जंगल का अनुकूल वातावरण और बाहर लगी गन्ने और धान की फसल में निकल रहे फूलों की मिठास हाथियों को बाहर निकलने की वजह बनी हुई है। यही वजह है कि महोफ रेंज में 15 दिन पूर्व से डेरा जमाए हाथी अब रात होने पर जंगल से बाहर निकलकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
लौटने पर बढ़ सकती हैं मुश्किलें
15 दिन पूर्व से पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगलों में डेरा जमाए हाथियों की संख्या अधिक होने के चलते निगरानी करना भी वनकर्मियों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। ऐसे में हाथियों के पुराने रास्ते से वापस लौटने के दौरान हाथियों के जंगल सीमा से सटी कॉलोनियों को सुरक्षित बचाना वन कर्मियों के लिए चुनौती माना जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें