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विवेचक पद से हटाए जाने के बाद कॉलेज में पूछताछ करने क्यों पहुंचे एसएसआई

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पीलीभीत। दुष्कर्म पीड़ित छात्रा का कहना है कि विवेचक पद से हटाए जाने के बाद भी एसएसआई सदाकत अली ने 14 दिसंबर को कॉलेज में पहुंचकर जांच पड़ताल की और परिसर में कई बार उनका नाम लिया। उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया गया है लेकिन वह घबराने वाली नहीं हैं। उन्होंने मामले में अपनी शिकायत बरेली मंडल के आईजी के पास भेज दी है। अगर वहां से भी न्याय नहीं मिला तो वह मुख्यमंत्री से मिलने लखनऊ जाएंगी। सवाल यही है कि जब विवेचक पद से एसएसआई हटा दिए गए है तो वह कालेज क्यों पहुंचे?
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बीएससी की छात्रा ने 21 नवंबर को महिला कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. कामरान आलम खान के खिलाफ दुष्कर्म और सैक्स रैकेट संचालित करने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। असिस्टेंट प्रोफेसर 26 नवंबर को गिरफ्तार किया गया। वह 27 नवंबर से जेल में है। इस बीच पुलिस अधीक्षक ने विवेचक पद से एसएसआई सदाकत अली को हटाकर प्रभारी निरीक्षक को विवेचक बना दिया था। छात्रा का कहना है कि जब विवेचक पद पर प्रभारी निरीक्षक हैं तो सदाकत अली कॉलेज में पूछताछ करने क्यों पहुंचे।
विवेचक पर सवाल उठाए थे छात्रा ने
छात्रा का कहना है कि जब एसपी से मिलकर उसने विवेचक पर सवाल उठाए थे तभी विवेचक बदला गया था। लेकिन बदले जाने के बाद भी विवेचना के लिए एसएसआई का पहुंचना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता है। मामले में उन्हें मुख्यमंत्री से न्याय की उम्मीद है। छात्रा का कहना है कि अगर वाकई में एसपी उसके साथ न्याय करना चाहते हैं तो ऐसे अधिकारी से जांच कराई जाए जो दोषियों के खिलाफ साक्ष्य एकत्र करने के लिए मेहनत करे और दोषी असिस्टेंट प्रोफेसर को सजा दिलाए।
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छात्रा की ओर से दर्ज मामले की जांच एसएसआई से हटाकर एसएचओ को दी गई है। अगर विवेचक पद पर तैनात संबंधित एसएचओ का स्थानातंरण हो जाता है, तो कोतवाली में कार्यभार संभालने वाले एसएचओ को विवेचना करनी होती है। ऐसे मामलों में विवेचना पद नाम से दी जाती है। अगर एसएसआई कॉलेज में जांच करने गए हैं तो इसकी सूचना पीड़िता ने अभी तक उन्हें नहीं दी है। अगर कोई शिकायत आती है तो जांच कराई जाएगी। फिलहाल मामले में जांच सिर्फ एसएचओ की ओर से ही कराई जा रही है।
- दिनेश कुमार पी, पुलिस अधीक्षक
हाल ही में स्थानांतरण होकर एसएचओ जांच करने कॉलेज गए थे। सिविल ड्रेस में दो महिला पुलिसकर्मी साथ में थी। महिला पुलिस कर्मियों ने ही छात्राओं के अलग-अलग कमरों में बयान लिए थे। इस दौरान वह दूसरे कार्यालय में बैठे रहे। उनका अब इस मामले की जांच से मेरा कोई मतलब नहीं है।
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- सदाकत अली, एसएसआई
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