गजरौला/पीलीभीत। छेड़खानी पीड़िता किशोरी के सगे भाई ने कहा कि उसके माता-पिता रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाना और पुलिस चौकी के चक्कर काटते रहे पर पुलिस ने सुनवाई नहीं की। पुलिस छेड़खानी के आरोपी को बचाने में जुटी रही। इसलिए छेड़खानी की तहरीर होने के बावजूद आरोपी का चालान शांतिभंग के अंदेशे में चालान किया गया।
पीड़िता के भाई ने पुलिस के रवैये पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उसने बताया कि छेड़खानी की वारदात 23 अप्रैल को शाम चार बजे हुई थी। शाम को छह बजे तक उसके पिता बहन साथ को लेकर थाने पहुंच गए थे। तहरीर दी थी और रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की। पुलिस ने तहरीर ले ली पर कार्रवाई नहीं की। दो दिन तक हर रोज माता-पिता दोनों थाने और चौकी के चक्कर लगाते रहे।
पुलिस से तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज करने और उसकी प्रति देने की मांग करते रहे। मगर पुलिस ने ऐसा नहीं किया। 26 अप्रैल को पुलिस गांव आई और आरोपी को पकड़ ले गई। शांति भंग के अंदेशे में चालान कर दिया। आरोपी जेल नहीं गया। गांव वापस आ गया। इसके बाद माता-पिता फिर से थाने गए। थानाध्यक्ष ने न तो रिपोर्ट दर्ज की और न ही कोई सुनवाई गई।
निराश होकर माता पिता ने पीलीभीत के वरिष्ठ अधिकारियों से गुहार लगाई। तब जाकर थाना प्रभारी ने 6 मई को छेड़खानी की रिपोर्ट दर्ज की। रिपोर्ट दर्ज करने के बाद थाना प्रभारी ने समझौते का दबाव बनाया। माता पिता नहीं माने तो सात मई को बहन का मेडिकल कराया गया। इसके बाद आठ मई को रविवार पड़ गया।
अगले दिन नौ मई को बहन के बयान अदालत में होने थे लेकिन इससे पहले तेजाब से हमला कर दिया गया। अगर पुलिस ने शुरू से प्रभावी कार्रवाई की होती तो ऐसी घटना न होती।