कलीनगर। शारदा नदी के पार नेपाल सीमा से सटे तराई क्षेत्र में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है।
गेहूं और गन्ने की फसल कटने के बाद अब अतिक्रमणकारियों ने दोबारा सरकारी जमीनों की जोताई शुरू कर दी है और खरीफ फसलों की तैयारी तेज हो गई है। संयुक्त सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब तक शुरू न होने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। कलीनगर तहसील क्षेत्र का शारदा पार इलाका एक ओर नेपाल सीमा, दूसरी ओर शारदा नदी और तीसरी ओर पूरनपुर तहसील से घिरा होने के कारण लंबे समय से अतिक्रमणकारियों के लिए सुरक्षित क्षेत्र बना हुआ है। यहां पीलीभीत टाइगर रिजर्व के कोर जोन, राजस्व विभाग और सिंचाई विभाग की जमीनों पर बड़े पैमाने पर कब्जे बताए जा रहे हैं। आरोप है कि कई लोगों ने गरीब पट्टेदारों की जमीनों तक पर खेती शुरू कर रखी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार नेपाल की शुक्ला फंटा सेंचुरी से सटे होने के कारण इस क्षेत्र को टाइगर रिजर्व का कोर जोन घोषित किया गया था, लेकिन अब यहां बड़े पैमाने पर जंगल कटान और खेती हो रही है। शीशम के पेड़ों की अवैध कटाई लगातार जारी है। कटान की लकड़ी नेपाल सीमा और पूरनपुर क्षेत्र तक पहुंचाए जाने की चर्चा है।
वहीं नदी पार बसे कुछ ग्रामीण भी घरेलू ईंधन के लिए जंगलों से लकड़ी काटकर ला रहे हैं। कुछ दिन पहले टाइगर रिजर्व अधिकारियों की टीम ने क्षेत्र में सर्वे कर बड़ी संख्या में कटे पेड़ों के अवशेष पाए थे, लेकिन अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
लोगों का कहना है कि हर वर्ष सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की बात होती है, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। इसके चलते गेहूं और गन्ने की फसल कटने के बाद अब अतिक्रमणकारियों ने दोबारा सरकारी जमीनों की जुताई शुरू कर दी है। एसडीएम प्रमेश कुमार ने बताया कि क्षेत्रीय टीम से जानकारी कर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। संवाद