पीलीभीत। तराई में इन दिनों उठते-गिरते तापमान ने नौनिहालों की सेहत पर गहरा प्रभाव डाला है। ऐसे में जागरूकता की कमी के चलते अभिभावक भी बच्चों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं, जिससे बच्चों में डायरिया, टाइफाइड जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ गई हैं। रोटा वायरस की चपेट में आने से प्रभावित बच्चे अभिभावकों के साथ जिला महिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। वहीं भर्ती वार्ड में भी नाजुक स्थिति में 28 बच्चे भर्ती हैं।
शनिवार की सुबह से ही बाल रोगियों की अभिभावकों के साथ एमसीएच विंग में लंबी कतार लग गई। दोपहर दो बजे तक लगभग 200 से अधिक बच्चों का चिकित्सकों की ओर से परामर्श दिया गया। इनमें 15 प्रतिशत से अधिक बच्चे असंतुलित मौसम में तेजी से सक्रिय होते रोटा वायरस की चपेट से पीड़ित दिखे।
विभागाध्यक्ष सहित अन्य चिकित्सकों ने बाल रोगियों के परामर्श लेने के साथ अभिभावकों को विशेष सलाह दी। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आजाद ने बताया कि गर्मी के साथ असंतुलित मौसम में रोटा वायरस सक्रिय हो जाता है, ऐसे में बच्चों की साफ-सफाई व खानपान पर विशेष एहतियात रखनी पड़ती है। बच्चे का बोतल दूध नहीं बदलने, बिना उबला पानी पिलाने, हल्का भोजन नहीं देने व ग्लूकोज, ओआरएस की सही मात्रा नहीं मिलने पर बच्चों में दिक्कतें बढ़ जाती हैं। चिकित्सकों ने बच्चों को दवाएं देने के साथ अभिभावकों से विशेष एहतियात बरतने की अपील की।
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30 बेड की इमरजेंसी हुई फुल, मरीजों को स्ट्रेचर पर कराना पड़ा इलाज
जेल से आए कैदी को भी नहीं मिला बेड, दो घंटे की मशक्कत के बाद वार्ड में शिफ्ट किए गए मरीज
पीलीभीत। जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर शुक्रवार रात को मरीजों का बढ़ता दबाव भारी पड़ता नजर आया। अस्पताल की 30 बेड की इमरजेंसी रात में पूरी तरह भर गई, जिससे कई मरीजों को बेड के इंतजार में घंटों परेशान होना पड़ा। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि जेल से उपचार के लिए लाए गए एक कैदी को भी तत्काल बेड उपलब्ध नहीं हो सका।
शुक्रवार रात इमरजेंसी वार्ड के सभी 30 बेड मरीजों से भर गए थे। इसी दौरान जेल प्रशासन की निगरानी में एक कैदी को इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन बेड खाली न होने के कारण उसे काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद कुछ मरीजों को अन्य वार्डों में शिफ्ट किया गया, तब जाकर एक बेड खाली हुआ और कैदी को भर्ती किया जा सका।