खारजा नहर की पटरी पर खड़ी झाड़ियों में वन्यजीव ले रहे शरण।
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माधोटांडा। जंगल से बाहर खारजा नहर क्षेत्र में बाघिन की सक्रियता बढ़ती जा रही है। वहीं ग्रामीण बाघिन के अलावा एक अन्य बाघ होने का भी दावा कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाघिन तो कुछ सालों से खारजा नहर क्षेत्र में देखी जा रही है, मगर एक बाघ भी कुछ दिनों से इस इलाके में घूम रहा है। जिसे लेकर ग्रामीणों मेें खासी दहशत देखी जा रही है।
टाइगर रिजर्व की बराही रेंज से बाहर खारजा नहर की पटरी का क्षेत्र पहले से ही वन्यजीवों के मामले में संवेदनशील माना जाता है। बराही जंगल से सटे हल्दीडेंगा क्षेत्र में जहां मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटना हो चुकी हैं, वहीं खारजा नहर की पटरी पर बाघ और तेंदुए के शव भी मिलते रहे हैं। दरअसल जंगल के बीच से गुजर रही खारजा नहर की दोनों पटरियों पर जंगल झाड़ियां खड़ी हुई हैं। इसके चलते जंगली सुअर समेत अन्य वन्यजीव भी इस क्षेत्र में अधिक आते हैं। शिकार की तलाश में बाघ और तेंदुए भी अन्य वन्यजीवों का पीछा करते हुए यहां तक आते रहे हैं।
जानकारों के मुताबिक खारजा नहर के आसपास पर्याप्त मात्रा में शिकार मिलने से बाघ नहर की झाड़ियों में ही शरण ले लेते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक बाघिन तो यहां कुछ सालों से लगातार देखी जा रही है। किसान और वन प्रेमी अतुल सिंह भी इस बात को स्वीकार करते हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि बाघिन की सुनने की क्षमता भी कम है और पिछले कुछ दिन वह कस्बे के निकट खारजा नहर पुल तक आने लगी है। ग्रामीणों का दावा है कि डगा गांव के समीप एक अन्य बाघ कुछ दिन से चहलकदमी कर रहा है। यह बाघ हल्दीडेंगा से डगा गांव तक घूम रहा है। हालांकि सामाजिक वानिकी प्रभाग ने वन्यजीवों की बढ़ती सक्रियता के बाद खारजा नहर क्षेत्र के आसपास निगरानी बढ़ा दी है। निगरानी के जिम्मा संभाले सामाजिक वानिकी के वन दरोगा अजमेर सिंह ने बताया कि बाघिन की मौजूदगी के बाद वनकर्मियों की टीमें निगरानी में लगी हैं, ताकि कोई घटना न हो। उन्होंने एक अन्य बाघ होने की जानकारी से अनभिज्ञता जताई है।
माधोटांडा क्षेत्र के डगा गांव के समीप सड़क से गुजरती बाघिन (फाइल फोटो)- फोटो : PILIBHIT