पीलीभीत। ग्रामीणों पर हमले के बाद गुस्साई भीड़ की पिटाई से हुई बाघिन की मौत का मामला शासन स्तर तक पहुंच गया है। पीसीसीएफ प्रोजेक्ट टाइगर के नेतृत्व में टाइगर रिजर्व पहुंची चार सदस्यीय टीम ने दियोरिया रेंज पहुंचकर स्टाफ के बयान दर्ज किए। इसके बाद घटनास्थल का मुआयना कर टाइगर रिजर्व के अफसरों से बातचीत कर स्थिति को जाना। शासन की जांच के बाद ऐसा माना जा रहा है बाघिन की मौत के मामले में दियोरिया रेंज स्टाफ भी कार्रवाई दायरे में है।
पूरनपुर क्षेत्र के अंतर्गत दियोरिया रेंज के जंगल से सटे ग्राम मटेहना में तीन दिन पूर्व नौ ग्रामीणों पर हमले के बाद एकत्र हुई भीड़ ने बाघिन की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। क्षेत्रीय वन दरोगा दिनेश गिरि के तहरीर पर वन क्षेत्र में प्रवेश कर बाघिन की हत्या के मामले में 31 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। शासन तक मामला पहुंचा तो उच्च स्तरीय टीम का गठन कर मामले की जांच शुरू की गई। इसी क्रम में पीसीसीएफ प्रोजेक्ट टाइगर पीके शर्मा के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम टाइगर रिजर्व पहुंची। दियोरियां रेंज पहुंचकर रेंजर समेत वनकर्मियों के अलग-अलग बयान दर्ज किए गए हैं। घटनास्थल का भी गहनता से मुआयना किया गया। माना जा रहा है कि बाघिन की मौत के मामले में रेंज स्टाफ भी कार्रवाई के दायरे में है। शासन स्तर से गठित टीम में पीसीसीएफ प्रोजेक्ट टाइगर के अलावा दुधवा के एफडी संजय पाठक, लखनऊ चिड़ियाघर के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. उत्कर्ष शुक्ला के अलावा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सदस्य मौजूद थे।
हर रेंज में बढ़ाए जाएंगे संसाधन
शासन स्तर से पहुंची टीम ने टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की स्थिति के साथ संसाधनों की जानकारी भी की। जिस पर अफसरों ने वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद टीम ने वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए हर रेंज में दो हाथी, एक अतिरिक्त ट्रैंक्युलाइज व एक्सपर्ट टीम लगाने के निर्देश भी दिए है। इसके लिए संसाधनों की कमी को पूरा करने के लिए अफसरों ने पत्राचार तैयार करना शुरू कर दिए है।
बाघिन की मौत के मामले में उच्च स्तरीय टीम ने पहुंचकर घटना से संबंधित दियोरिया रेंज स्टाफ के बयान दर्ज किए हैं। इसके अलावा मौका मुआयना भी किया। वन्यजीवों की सुरक्षा व मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए भी जरूरी दिशा निर्देश मिले हैं।
- नवीन खंडेलवाल, डीएफओ, पीलीभीत टाइगर रिजर्व