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इंटर कॉलेजों के खेल मैदान पड़े हैं बदहाल, कहां खेलेंगे विद्यार्थी

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ड्रमंड कॉलेज का खेल मैदान। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। पढ़ाई के साथ खेलकूद भी जरूरी हैं। अच्छा खिलाड़ी बनने का सपना भी कॉलेज के मैदान से ही ऊंची उड़ान भरता है। पर सवाल यह है कि क्या अपने जिले के इंटर कॉलेजों में बेहतर खेल की सुविधाएं हैं? जवाब होगा नहीं। अच्छे मैदान होना तो दूर तमाम कॉलेजों में खेल मैदान ही नहीं हैं। जिन कॉलेजों में मैदान हैं भी वो देखरेख के अभाव में बदहाली से जूझ रहे हैं। कहीं ऊबड़ खाबड़ जमीन है तो कहीं झाड़ियां उगी खड़ी हैं।
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माध्यमिक शिक्षा परिषद के कॉलेज एक जुलाई से खुल जाएंगे। परिषद की तरफ से पूरे साल के लिए एक खेल कैलेंडर भी जारी होता है। एथलेटिक्स, भारोत्तोलन, बाक्सिंग, फुटबॉल, हॉकी, वॉलीबॉल जैसी तमाम प्रतियोगिताएं इसमें शामिल होती हैं। छात्रों को कॉलेज स्तर से प्रदेश स्तर तक अपनी प्रतिभा का हुनर दिखाने का मौका मिलता है। लेकिन इन प्रतिभावान छात्रों से कॉलेज स्तर पर सुविधाएं देने के नाम पर खेल ही होता है। अभ्यास के लिए न मैदान हैं न खेल शिक्षक। जबकि हर छात्र से क्रीड़ा शुल्क भी वसूला जाता है। जिले में राजकीय, अनुदानित और वित्तविहीन कॉलेजों की संख्या 170 है, लेकिन खेल मैदान पचास फीसदी संस्थाओं में भी नहीं हैं।
मैदान पर झाड़ियां और गड्ढों की भरमार
जिला पंचायत द्वारा संचालित अवंतीबाई कॉलेज में सैकड़ों छात्राएं पढ़ती हैं। कॉलेज के मुख्य गेट के पास ही छोटा सा मैदान बना है। इस मैदान पर झाड़ियां उग आईं हैं। मैदान भी समतल नहीं हैं। जबकि कॉलेज परिसर में काफी जगह है जहां खेल मैदान विकसित किया जा सकता है। प्रधानाचार्य अजय चौहान कहतीं हैं कि छुट्टियां चल रहीं हैं। इसलिए घास नहीं कट सकी। अब कॉलेज शुरू होते ही मैदान समतल करा दिया जाएगा। दूसरी तरफ शहर का ऐतिहासिक कॉलेज ड्रमंड राजकीय इंटर कॉलेज है यह अन्य कॉलेजों के मुकाबले ड्रमंड कॉलेज के पास सबसे बड़ा मैदान है। अगर मौजूदा समय की बात करें तो मैदान के आसपास घास खड़ी है। इस मैदान को बहुत अच्छा बनाया जा सकता है, लेकिन प्रयास नहीं किए गए।
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प्रधानाचार्य संतोष कुमार का कहना है कि कॉलेज के समय में मैदान साफ सुथरा रखा जाता है। मैदान को और बेहतर करने के प्रस्ताव दिए गए हैं। नए सत्र में मैदान और अच्छा बनाया जाएगा।
हर कॉलेज में खेल मैदान होना जरूरी
कॉलेज की मान्यता के दौरान खेल मैदान प्रमुखता से देखा जाता है। अगर कॉलेज के पास विद्यार्थियों के खेलने के लिए अच्छा मैदान नहीं हैं तो उसकी मान्यता रोकी जा सकती है। जिले का हाल बहुत खराब है। राजकीय और अनुदानित कॉलेजों में फिर भी दिखावे के लिए मैदान हैं, लेकिन ज्यादातर वित्तविहीन कॉलेजों में मैदान हैं ही नहीं।
जिले में कितने कॉलेज
राजकीय कॉलेज : 28
अनुदानित कॉलेज : 22
वित्तविहीन कॉलेज : 120
एक जुलाई से कॉलेज खुल जाएंगे। प्राथमिकता के आधार पर खेल मैदानों को दुरुस्त कराया जाएगा। माध्यमिक कॉलेजों की तमाम प्रतियोगिताएं भी होती हैं। उनका भी आयोजन कराया जाएगा। जिन कॉलेजों में खेल मैदान नहीं हैं, उनसे जवाब तलब किया जाएगा।
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-ओपी सिंह, डीआईओएस

अवंती बाई बालिका विद्यालय के खेल के मैदान में उगीं झाड़ियां। संवाद- फोटो : PILIBHIT

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