गजरौला/पीलीभीत। छेड़खानी पीड़ित किशोरी के साथ पुलिस ने भी ज्यादती की। उसकी मदद करने के बजाय दबाव बनाया कि समझौता कर लो। किशोरी का कहना है कि सुहासनगर चौकी इंचार्ज ने उसके पिता से कहा कि रिपोर्ट दर्ज कराने से पहले सोच लो। ऐसे मामलों में समझौता ही ठीक रहता है। किशोरी के भाई ने आरोपी राजेश और उसके पिता को भी तेजाब फेंकने की घटना में शामिल बताया है। साथ ही पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
गजरौला थाना क्षेत्र के एक गांव की किशोरी के साथ 23 अप्रैल को छेड़खानी हुई थी। पीड़िता के पिता उसी दिन कार्रवाई के लिए सुहास पुलिस चौकी में तहरीर देकर आए लेकिन पुलिस ने जांच की बात कहकर प्रार्थना पत्र दबा लिया। पीड़ित परिवार थाने गया पर कुछ नहीं हुआ। पीड़ित परिवार ने विधायक के घर दस्तक दी। इसके बाद पीड़ित परिवार एसपी से मिला।
एसपी के हस्तक्षेप के 13 दिन बाद छह मई को गजरौला थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार नहीं किया। किशोरी के भाई ने बताया कि पुलिस आरोपी की तरफदारी कर रही थी और चौकी पर तैनात दरोगा जी कह रहे थे कि आगे- पीछे सोच लो, समझौता करना ठीक रहेगा।
मेडिकल के लिए मना किया तो मुकदमा खारिज कर दूंगा - पीड़ित किशोरी ने बताया कि मुकदमा लिखे जाने के बाद से पुलिस और आरोपी परिजन समझौते का दबाव बना रहे थे। मना करने पर मां-बाप पर तेजाब फेंक दिया गया। पुलिस आरोपियों से मिली हुई है। पीड़िता ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद वह बयान देने के लिए थाने गई थी।
तब बड़े साहब कह रहे थे कि अगर यह मेडिकल के लिए मना किया तो मुकदमा खारिज कर दूंगा। तभी एक महिला सिपाही को भेजकर उसका पीलीभीत मेडिकल परीक्षण करवाया गया। इसी क्रम में नौ मई को अदालत में बयान होने थे लेकिन उससे पहले ही रात में यह घटना हो गई।