पीलीभीत। निजी अस्पताल पर मरीज के शव का इलाज कर लाखों रुपये की वसूली के लगे आरोपों की जांच शुरू हो गई। सीएमओ की ओर से गठित टीम ने शनिवार को निजी अस्पताल के चिकित्सक के बयान दर्ज किए। हालांकि अफसरों का दावा है कि पीड़ित पक्ष बयान देने नहीं पहुंचा। इस मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से न्याय न मिलने पर विधानसभा के सामने आत्मदाह की धमकी देने की चेतावनी के बाद अफसर गंभीर हुए हैं।
मामला शहर के गौहनिया रेलवे क्राॅसिंग के पास स्थित निजी अस्पताल का है। पूरनपुर क्षेत्र के चांट फिरोजपुर निवासी विष्णु की मौत के बाद परिजनों की ओर से चिकित्सक पर गंभीर आरोप लगाए थे। मृतक के भाई रामू पुत्र प्रेमराज ने अफसरों को दिए शिकायतीपत्र में कहा था कि हादसे के बाद भाई को सरकारी अस्पताल के बाद निजी अस्पताल में लाकर भर्ती कराया था। ऑपरेशन के नाम पर उसी दिन चिकित्सक ने एक लाख रुपये जमा कराए। जमीन गिरवी रखकर अस्पताल में रुपये जमा किए। चार दिन तक आईसीयू में भर्ती रखा गया। इस दौरान किसी भी परिजनों को भाई को देखने तक नहीं दिया। चार दिन बाद जब आठ जून को परिजनों ने आईसीयू में भर्ती विष्णु को देखा तो उन्हें संदेह हुआ। इसपर चिकित्सक से बातचीत की। इसपर उसने लापरवाही छिपाने के लिए मरीज को रेफर कर दिया। कक्ष से बाहर निकालने पर वह मृत निकाला। परिजनोंं ने दो दिन पूर्व ही उसकी मौत हो जाने का आरोप लगाया था। मरीज के शव के इलाज के नाम पर तीन लाख रुपये वसूलने के भी आरोप लगे थे।
इस मामले में पोस्टमाॅर्टम के बाद दो दिन तक परिजनों की ओर से कोई शिकायतीपत्र नहीं दिया गया। शुक्रवार को मृतक के भाई डीएम समेत अफसरों को पत्र देकर चिकित्सक को नामजद करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। कार्रवाई न होने पर सपरिवार विधान सभा के सामने आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी। इधर सीएमओ की ओर से गठित तीन सदस्यीय चिकित्सकों की टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी। शनिवार को मामले में आरोपी पक्ष के बयान दर्ज किए गए। जबकि पीड़ित पक्ष बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचा। सीएमओ डॉ. आलोक कुमार शर्मा ने बताया कि मामले में जांच शुरू कर दी है। बयान दर्ज किए जा रहे हैं।