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Pilibhit News: बजट से रेशम और खादी उद्योग को मिलेगी नई संजीवनी, रोजगार के बढ़ेंगे अवसर

Sun, 01 Feb 2026 11:59 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
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पीलीभीत। केंद्रीय बजट में कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए की गई घोषणाओं से जिले के रेशम, खादी और हथकरघा से जुड़े लोगों में उत्साह है। शहतूत की खेती, रेशम उत्पादन और खादी उद्योग से जुड़े स्थानीय प्रयासों को अब राष्ट्रीय योजनाओं के जरिये नई पहचान और मजबूती मिलने की उम्मीद जगी है। इससे न सिर्फ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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जिले में स्वयं सहायता समूह की 50 से अधिक महिलाओं को शहतूत की खेती से जोड़ा गया है। शहतूत के पेड़ पर ही रेशम का कीट पलता है, इससे रेशम का धागा तैयार करने के लिए कच्चा माल उपलब्ध होता है। महिलाओं को खेती के साथ अतिरिक्त आय का साधन मिल रहा है। शहर में पहले से ही रेशम का धागा बनाने का कार्य होता है, इससे स्थानीय कपड़ा बाजार को मजबूती मिलने की संभावना है।
वित्त मंत्री ने बजट में राष्ट्रीय फाइबर नीति के तहत रेशम, ऊन और जूट को बढ़ावा देने की घोषणा की है। इसके साथ ही हैंडलूम मिशन, समर्थ-2.0 और मेगा टेक्सटाइल पार्क की स्थापना जैसे कदमों से कपड़ा उद्योग में रोजगार सृजन को गति मिलेगी। महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के माध्यम से खादी, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट को बढ़ावा दिया जाएगा।
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इससे एक जिला-एक उत्पाद और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को लाभ मिलेगा। इसके अलावा पारंपरिक क्लस्टरों के आधुनिकीकरण के लिए वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना, बुनकरों और कारीगरों की सहायता के लिए राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम लाए जाएंगे। जिले के हजारा क्षेत्र में स्थित खादी फैक्ट्री और रेशम उद्योग से जुड़े कारीगरों को इन योजनाओं से सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर बजट की घोषणाएं पीलीभीत के कपड़ा उद्योग को नई दिशा देने वाली मानी जा रही हैं। संवाद


विदेश में पढ़ाई और यात्रा करने वालों को मिलेगा लाभ
केंद्रीय बजट में एक ओर विदेश यात्रा, शिक्षा और चिकित्सा पर लगने वाले टीसीएस की दरों में कटौती कर मध्यम वर्ग को राहत दी गई है, वहीं दूसरी ओर अघोषित विदेशी संपत्ति रखने वालों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर देने के संकेत भी बजट में मिले हैं। बजट में विदेश यात्रा कार्यक्रमों पर पैकेज की बिक्री पर टीसीएस की दर घटाकर 2 प्रतिशत करने का प्रावधान किया गया है। इसी तरह विदेश में शिक्षा और चिकित्सा के लिए लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत टीसीएस की दर भी घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है। इसके अलावा कार्यबल सेवाओं पर लगने वाली टीडीएस की दर को भी घटाकर एक से दो प्रतिशत किया गया है। जिले के पूरनपुर, अमरिया और मझोला क्षेत्रों में सिख बहुल इलाकों में बड़ी संख्या में लोग अध्ययन वीजा पर विदेशों में रह रहे हैं। उनके परिजनों का भी विदेश आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में टीसीएस दरों में कटौती से इन परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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