पीलीभीत। परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में शामिल हुए विद्यार्थियों ने कहा कि प्रधानमंत्री की बातों को सुनकर उन्हें सकारात्मक और प्रेरणादायक अनुभव मिला है। परीक्षा को बोझ नहीं, बल्कि उत्सव की तरह लेने की जरूरत है। शहर केंद्रीय विद्यालय समेत जिले के कई विद्यालयों में शुक्रवार को प्रधानमंत्री के परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दिखाया गया।
केंद्रीय विद्यालय में कक्षा छह से 12 तक के विद्यार्थियों को अलग-अलग कक्षाओं में बड़ी स्क्रीन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देखने और सुनने का अवसर मिला। बच्चों ने बहुत ही उत्साह पूर्वक प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए सुझावों और बिंदुओं को ध्यान से सुना और समझा। कार्यक्रम के बाद विद्यालय के प्रवक्ता सूर्य प्रकाश सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम से बच्चों को परीक्षा को लेकर डर कम होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाले नहीं, बल्कि छात्रों के मार्गदर्शक और प्रेरक होते हैं।
यह सुनकर शिक्षक के रूप में अपनी जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण महसूस होती है। कार्यक्रम में यह संदेश मिलता है कि बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें और उन्हें अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने दें। इससे शिक्षा का माहौल सकारात्मक और सहयोगपूर्ण बनाने की प्रेरणा मिलती है। इस मौके पर विद्यालय के प्राचार्य असलम जावेद, वरिष्ठ शिक्षक कमलाकांत, शलभ अग्रवाल, सूर्य प्रकाश सिंह, पायल यदुवंशी, मुकेश पाल, रिचा त्रिवेदी, जयदेव कुमार, हरिराम आदि शिक्षक मौजूद रहे। संवाद
कहा-परीक्षा के साथ जीवन में उपयोगी बातें को मिली सीख
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में बताया कि सकारात्मक दृष्टिकोण और खुद पर भरोसा रखने से कठिन से कठिन विषय भी आसान लगने लगते हैं। गलतियों से सीखकर आगे बढ़ना ही सफलता का रास्ता है। स्वस्थ जीवन शैली, अच्छी नींद, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से मन और शरीर दोनों स्वस्थ रहते हैं। इससे पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है। अपनी समस्याओं और शंकाओं को माता-पिता व शिक्षकों से साझा करना चाहिए। - कृष्णा पांडेय, कक्षा 10
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प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से हमें कई महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं जो केवल परीक्षा ही नहीं बल्कि जीवन में भी उपयोगी हैं। परीक्षा को बोझ या डर के रूप में नहीं बल्कि उत्सव और अवसर के रूप में देखना चाहिए। तनाव कम करके आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। हमें दूसरों से तुलना करने के बजाय स्वयं को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए। हर दिन थोड़ा-थोड़ा सुधार ही असली सफलता है। - खुशी, कक्षा 12
कृष्णा पांडेय, कक्षा 10