कलीनगर। शारदा नदी ने पिछले वर्षों में बारिश के दिनों में बाढ़ के रूप में तबाही मचाई थी। इसके बाद बाढ़ खंड के अफसरों ने काफी लंबे दायरे में मजबूत बांध बनाया था। इसके बाद मरम्मत के नाम पर खेल होने लगा। इस वजह से पिछले साल नदी की बाढ़ ने मजबूत बांध को कई जगह से क्षतिग्रस्त कर दिया था। इस बार फिर बांध को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये का बजट मंजूर किया गया, लेकिन अभियंताओं ने रेत से भरे बोरे लगाकर इतिश्री कर ली है। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार नदी में बाढ़ आई तो फिर बड़ा नुकसान होगा। बाढ़ नियंत्रण योजना के साथ आबादी क्षेत्र पर भी खतरा बढ़ जाएगा।
विरोध के साथ हुई कार्य की शुरुआत फिर भी न रुका
बाढ़ प्रोजेक्टों पर मंजूरी के बाद दो माह पूर्व विधायक बाबूराम पासवान ने कार्यों का शुभारंभ किया। शुरुआत में ही विधायक की मौजूदगी में ग्रामीणों ने बाढ़ अभियंताओं पर मरम्मत के नाम पर गंभीर आरोप लगाए थे। फिर ऐसा माना गया कि कार्यों में सुधार होगा, लेकिन देरी से कार्य शुरू होने के चलते जल्दबाजी हावी दिखी। मजबूत बांध को सुरक्षित रखने के नाम पर ऊपरी भाग में आरबीएम की जगह रेत डाल दी गई। बांध को नया रूप देने के लिए पॉकलेन मशीन से दोनों किनारों छिलाई कर दी गई। कोई उच्च अधिकारी कार्य का निरीक्षण करने नहीं पहुंचा। क्षेत्रीय प्रशासनिक अफसरों को अभियंता गुमराह करने में जुटे हैं। नगरिया खुर्द कला में ही स्पर संख्या 9ए का एप्रेन काफी चौड़ाई में रखा गया। जलस्तर बढ़ने से पानी भीतरी हिस्से की मजबूती भी कम हो गई।
यह कार्य कराए गए थे
पूर्व में नोमैंस क्षेत्र के निकट आबादी को सुरक्षित रखने के लिए बांध बनाने में अभियंताओं ने काफी गंभीरता दिखाई थी। बांध के क्षेत्र में पहले जमीनी तल पर रेत से भरकर मजबूत जिओ बैग लगाए गए। उसके ऊपरी हिस्से में जिओ ट्यूब में रेत भर काफी मजबूती के साथ लगाए गए। प्लास्टिक की बेल्ट से बांधकर प्रत्येक जिओ ट्यूब को आपस में जोड़ा गया था। उसके ऊपरी हिस्से में भी आरबीएम बिछाकर पूरी तरह से सड़क बनाई गई थी। कई साल तक बांध ने क्षेत्र को सुरक्षित रखा, लेकिन पूर्व वर्षो में मरम्मत के नाम पर बजट को ठिकाने लगाने के खेल के चलते नदी ने पिछले बाढ़ में मजबूत बांध को कई स्थानों से बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।
नौजल्हा नंबर दो और नगरिया खुर्द कला दोनों स्थानों पर बाढ़ नियंत्रण योजनाएं काफी मजबूती से बनाई जा रही है। इसमें गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। -ध्रुव नारायण, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड पूरनपुर