वन विभाग ने अब तक नहीं शुरू किए सुरक्षा उपाय
जिले में गन्ना पेराई का सीजन शुरू हो गया है। गन्ना सीजन के साथ ही ठंड बढ़ने से बाघों के हमले का खतरा बढ़ गया है, लेकिन विभाग ने अब तक सुरक्षा उपाय नहीं किए हैं। विभाग की यह लापरवाही किसानों पर भारी पड़ने के साथ ही पुलिस प्रशासन के लिए भी सिरदर्द साबित हो सकती है।
गत वर्ष जिलेे में बाघों के हमले की शुरूआत 24 अक्तूबर को मरौरी गांव के निकट से ही हुई थी। इसके बाद साल भर चले हमलों में 19 किसानों की जान चल गई। जिसमें गन्ना सीजन के छह महीनों में 12 से अधिक किसान बाघ के हमले में मारे गए थे। हमलों के समय आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराने के लिए विभाग के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने सोलर फेसिंग कराने के आश्वासन दिए थे। ग्रामीणों को किए गए वादों पर अब तक अमल नहीं हुआ। अब गन्ने का सीजन शुरू होने पर बाघ के हमलों की संभावनाएं बढ़ गई हैं। गन्ना छीलते समय उसमें पिछले बाघ किसानों को आसानी से अपना निवाला बना सकते हैं।
अब तक नहीं शुरू हुई तार फेसिंग
बाघ एवं वन्यजीवों को जंगल से बाहर आने से रोकने के लिए तार फेसिंग कराए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। बरखेड़ा और पूरनपुर विधायक के अलावा केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी अपनी सांसद निधि से धनराशि दी थी। जनप्रतिनिधियों से 25 लाख की धनराशि मिलने पर भी काम शुरू नहीं हो सका। अब इसका टेंडर प्रकाशित किया गया है। जिस पर काम शुरू होने पर अभी समय लगेगा जिससे इस सीजन में तार फेसिंग का लाभ किसानों को मिलना मुश्किल लग रहा है।
हाथियों की व्यवस्था भी नहीं
गत वर्ष लगातार हुए हमलों के बाद वन संरक्षक वीके सिंह ने रेस्क्यू टीम बनाने की घोषणा की थी जिसमें चार हाथी भी रखे जाने थे। इसके लिए कर्नाटक से हाथी मंगवाए जाने को स्वीकृति शासन से मिली थी, लेकिन लगभग आठ माह से चल रही प्रक्रिया के बाद भी पीलीभीत टाइगर रिजर्व को हाथी नहीं मिल सके।
बाहर घूम रहे बाघ बनेंगे मुसीबत
विभाग जंगल के किनारे तार फेसिंग कराने की तैयारी में हैं। इससे जंगल के अंदर से वन्यजीव तो बाहर नहीं आ सकेंगे लेकिन जो बाघ एवं वन्यजीव जंगल से बाहर घूम रहे हैं उनका जंगल लौटना मुश्किल है। यही बाघ और वन्यजीव ग्रामीणों के लिए सबसे ज्यादा मुसीबत बनेंगे।
तार फेसिंग के लिए टेंडर निकाला गया है। जल्द काम शुरू कराया जाएगा। जंगल के बाहर क्षेत्र में सामाजिक वानिकी की टीम नियमित निगरानी कर रही है। डीएम के माध्यम से जंगल से सटे क्षेत्र के किसानों को प्राथमिक के आधार पर पहले गन्ना पर्ची दिलवाई जा रही है।
- कैलाश प्रकाश, डीएफओ टाइगर रिजर्व