कलीनगर। शारदा सागर डैम अब विदेशी पक्षियों को रास नहीं आ रहा है। उनकी संख्या साल दर साल लगातार घट रही है। डैम के कुछ हिस्सों का मिटटी से पट जाना। डैम क्षेत्र में लोगों की आवाजाही बढ़ना इसकी मुख्य वजह है।
जिले में 22 किमी लंबा शारदा सागर डैम है। मरम्मत के अभाव में डैम की स्थिति लगातार जर्जर होती जा रही है। वर्ष 1982 में डैम को खाली कर भीतरी हिस्से की सफाई कराई गई थी, लेकिन उसके बाद से आज तक सफाई नहीं हो सकी है। लिहाजा डैम के कई हिस्सों में घास उग आई है। इधर ठंड बढ़ते ही प्रवासी पक्षियों की आमद शुरू हो जाती है। मेहमान पक्षियों का मुख्य भोजन छोटी मछलियां ही होती हैं। डैम में बीडिंग न होने से प्रवासी पक्षियों के सामने भोजन की किल्लत आ रही है। इसीलिए डैम की सुंदरता बढ़ाने के लिए आने वाले मेहमान पक्षियों की संख्या में लगातार कमी आ रही है।
जनपद की ट्रंक्यूलाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष अख्तर मियां लाइन ट्रांजेक्ट के माध्यम से कई वर्षों से प्रवासी पक्षियों का सर्वे करते आ रहे हैं। इसमें मेहमान पक्षियों की विभिन्न श्रेणियां सामने आई हैं।
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संख्या कम होने के मुख्य कारण
- शारदा डैम में वर्षों से सफाई न होने से चारे की कमी
- डैम मेें मछलियों का शिकार बढ़ना
- तीन रेंजों की सीमा से सटे डैम क्षेत्र में रहती है लोगों की दखलंदाजी
-वाटर स्पोर्ट्स की गतिविधियां बढ़ना
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चार साल से संख्या में आई कुछ गनीमत
19 पीबीटीपी
दो दशक पहले पक्षियों की संख्या 40 हजार थी लेकिन संख्या काफी घट गई। हालांकि चार साल से संख्या में कुछ इजाफा हो रहा है। डैम में मानव की अधिक दखलंदाजी और वाटर स्पोर्ट्स सेंटर से पक्षी ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
- अखतर मियां, अध्यक्ष, ट्रंक्यूलाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी
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सर्वे के आंकडों पर नजर
वर्ष पक्षियों की संख्या
2001 45000
2002 43010
2003 41100
2004 39125
2005 37500
2006 32000
2007 28000
2008 21871
2009 11720
बीच के वर्षों में गणना का कार्य प्रभावित रहा
वर्ष 2017 में 6417 और 2020 में संख्या घटकर 5219 रह गई।