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शाहगढ़ से पलायन कर गए दो परिवार

Sat, 08 Aug 2015 10:44 PM IST
Purnpur
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शाहगढ़ में मदरसा में नमाज पढ़ने को लेकर 24 जुलाई को हुए विवाद के बाद गांव से दो परिवार शनिवार को पलायन कर गए। गांव के लोगों ने दोनों परिवारों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन परिवारों के मुखिया का कहना था कि अल्लाह की इबादत भी न कर सके। ऐसे स्थान पर रहना क्या।  
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माधोटांडा थाना क्षेत्र के गांव शाहगढ़ में 24 जुलाई को मदरसा में नमाज पढ़ने को लेकर बवाल हो गया था। जमकर पथराव और फायरिंग हुई थी। अफसरों, पुलिस को भीड़ से बचने को भारी मशक्कत करनी पड़ी थी। हालात पर काबू पाने को पुलिस को भी रबड़ की गोलियां चलाई थी। इससे आधा दर्जन लोग घायल हुए थे। आरोप है कि पुलिस ने गांव वालों पर जमकर कहर बरपाया। घरों में घुसकर निर्दोष लोगों की पिटाई की। इस मामले में पुलिस ने 14  लोगों को नामजद कर 150 लोगों के खिलाफ बलवा, जान  से मारने की नियत से हमला करने आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस अब तक 12 लोगाें का चालान कर चुकी है। गांव में अमन शांति बनाने को पुलिस, प्रशासनिक अफसर कई दिनों तक जमे रहे। तत्कालीन डीएम ने गांव में चौपाल लगाकर शांती बनाने का आवाहन किया। इधर, अब गांव से लईक अहमद और उसके छोटे भाई इकबाल की विधवा जरीना बेगम का परिवार शनिवार को गांव से पलायन कर गया। एकत्र हुए गांव के तमाम लोगों ने दोनों परिवारों को रोकने का प्रयास किया। पलायन कर रहे लईक अहमद ने बताया कि घटना से पहले तक मदरसा में रोज तीन वक्त की नमाज पढ़ लिया करते थे। मदरसा में नमाज पढ़ने को मिलेगी। इसका इंतजार करते पखवाड़ा बीत गया। नमाज तक पढ़ने को न मिले ऐसे गांव में रहने का क्या मतलब। जरीना बेगम ने बताया कि गांव मेें बवाल से पहले सब कुछ ठीक था। सभी समुदाय के लोग आपस में मिलकर रह रहे थे। अब गांव का माहौल खराब हो गया है। नमाज भी पढ़ने को नहीं मिल रही है। परिवारों के मुखिया ने बताया कि वे लोग अब पूरनपुर देहात में रहेंगे।

गांव का माहौल पूरी तरह अब शांत है। विवाद दुबारा न हो। इसके लिए लगातार दोनों पक्षों से वार्ता की जा रही है। गांव से दो परिवारों के पलायन की जानकारी नहीं है।  -राजेश्वर सिंह, सीओ पूरनपुर।
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